36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने की संभावना, हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें प्रभावित
केके वर्मा, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटों से जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम की स्थिति को देखते योगी सरकार ने राहत दल को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शनिवार को प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्याओं का त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
डॉ भास्कर यशोद ने स्पष्ट किया कि हर परिस्थिति में आमजन की जान- माल की सुरक्षा जिलाधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। नेपाल में हो रही भारी बारिश के मद्देनजर सीमावर्ती जिलों, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा। जिलाधिकारियों को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा गया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 36 घंटों के बाद प्रदेश में मौसम सामान्य होने की संभावना है। राहत आयुक्त ने आमजन से अपील की है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। उन्होंने लोगों से प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।
प्रदेश के 63 जनपदों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई। फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना, कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य वर्षा हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। वहीं बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में वर्षा नहीं हुई। पिछले 48 घंटों में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों को पूरी संवेदनशीलता के साथ अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश हैं।
भारी बारिश से क्षति का तत्काल सर्वेक्षण, आकलन कराने और प्रभावित लोगों को राहत सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है। जिलाधिकारियों को निर्देश है कि आवश्यकता के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं ली जाएं। जिलाधिकारियों को स्वयं फील्ड में रहकर स्थिति का लगातार आकलन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों के माध्यम से कच्चे मकानों के आस-पास जलभराव की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेने के निर्देश हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था के साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश हैं।


