परिवहन विभाग के सेवानिवृत कर्मचारियों को कई महीने से नहीं मिली पेंशन
जगदीश ममंगाई, नई दिल्ली
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता नीत बहुइंजन भाजपा सरकार के आने के उपरांत सार्वजनिक परिवहन विशेषकर बस सेवा चरमरा गई है। एक तरफ तो दिल्ली के मुख्य रुटों पर बसों की कमी हो गई है और यात्रियों को घंटों बस का इंतजार करना पड़ रहा है। तो दूसरी तरफ दिल्ली परिवहन निगम के कर्मचारी जिन्हें आम तौर पर हर महीने की पहली तारीख को वेतन मिल जाता था, देरी से कई माह बाद वेतन मिल रहा है।
परिवहन विभाग के कांट्रेक्ट बस ड्राइवर, कंडक्टर भी कम वेतन मिलने, कई माह तक वेतन न मिलने पर विरोध में सड़क पर उतर जाते हैं, जब मर्जी हड़ताल कर देते हैं, जिससे बसों की कमी झेल रहे दिल्लीवासियों की परेशानी बढ़ जाती है।
डीटीसी से सेवानिवृत कर्मचारियों को पिछले कई माह से पेंशन नहीं मिली है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा नेताओं ने 10792 बस मार्शलों, सिविल डिफेंस कार्यकर्ताओं को नियमित रोजगार देने के लिए सड़क से विधानसभा तक हंगामा मचाया था और सत्ता में आने पर 60 दिनों के भीतर उन्हें वापस नौकरी पर रखने व नियमित करने का अश्वासन दिया था, लेकिन सवा साल से अधिक समय के बाद उन्हें नौकरी वापिस नहीं मिली और डीटीसी, परिवहन विभाग के कर्मचारी भी आंदोलन की राह पर हैं।
दिल्ली में बीजेपी सरकार के आने के समय 8052 बसें परिचालन में थीं, 2000 इलेक्ट्रिक बसें आने की राह में थी। भाजपा सरकार बनते ही ओवरएज बता 2000 डीटीसी बसें सड़कों से हटाई गईं।
डिम्टस के अधीन चलने वाली क्लस्टर बसों का अनुबंध नवीनीकरण नहीं किया, जिससे इनका संचालन बंद हो गया। नई बसें आईं नहीं, पुरानी बंद कर दी, जिससे दिल्ली में बसों की भारी कमी हो गई और दिल्ली की परिवहन व्यवस्था बदतर हो गई। वर्तमान में दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में डीटीसी द्वारा संचालित 12 मीटर वाली 1800 व 9 मीटर वाली 779 इलेक्ट्रिक बसें, लगभग 50 सीएनजी बसें हैं, जिनकी संख्या 2630 है। परिवहन विभाग द्वारा संचालित 12 मीटर वाली 473 व 9 मीटर वाली 483 तथा 1860 सीएनजी बसें हैं, यानी बसों की कुल संख्या 5447 है। सरकार ने उबर, ओला, रैपिडो जैसे कैब सर्विस प्रदाता को बेस किराया दोगुना तक करने की अनुमति भी दे दी है।
मोहल्ला बसों पर रंग पोत ‘देवी’ के नाम से चलाई जा रही बसों से लगातार हादसे, एक्सीडेंट हो रहे हैं, जान जा रही है। ‘देवी’ बस का बार-बार रंग बदलने के बावजूद एक्सीडेंट नहीं रुके।
आरोप है कि परिवहन विभाग के तहत बसों को चलाने के लिए दिल्ली सरकार ने निजी कंपनी के हवाले किया, जिन्होंने ऐसे ड्राइवरों को रखा है, जो कभी ऑटो रिक्शा या ट्रैक्टर चलाते थे। अप्रशिक्षित ड्राइवरों के इन बसों को चलाने से दिल्लीवासियों की जिंदगी खतरे में डाल दी है। जबकि डीटीसी में 8000 चालक हैं, अभी डीटीसी की लगभग 2000 बसें चल रही हैं, कई चालकों के पास चलाने के लिए बस ही नहीं है। कुप्रबंधन व लापरवाही का आलम यह है कि रोजाना 100 से अधिक बसें ब्रेकडाउन का शिकार हो रही हैं, दिल्ली की इलेक्ट्रिक बसों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो दिल्लीवासियों के लिए खतरे का सबब हैं! लगातार आग लग रही हैं। अगस्त 2025 में दिल्ली सरकार और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन द्वारा संयुक्त रुप से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि बस चालक सीमा से अधिक तेज गति में ड्राइविंग करते हैं। दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही दिल्ली सरकार के कुप्रबंधन व भ्रष्टाचार से सार्वजनिक परिवहन, डीटीसी की स्थिति बदतर हुई है।
घंटों इंतजार करने पर भी यात्रियों को बस मिलने की गारंटी नहीं, बस आए तो ड्राइवर स्टॉप पर बस रोक सवारी चढ़ाते नहीं, भीड़ व धक्का-मुक्का में बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों का बस में चढ़ना व यात्रा करना मुश्किल है!
भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार बनने के बाद से, सवा साल से अधिक समय से जहां संघर्षरत 10792 बस मार्शलों व सिविल डिफेंस कर्मचारी बेरोजगार हो सड़कों पर उतर फांके करने को मजबूर हैं। वहीं, डीटीसी, परिवहन विभाग के कर्मचारी वेतन समय से न मिलने पर अक्सर हड़ताल कर देते हैं।
जबकि दिल्ली सरकार का एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का बजट है, धनराशि की तंगी नहीं है। फिर भी परिवहन विभाग, डीटीसी कर्मचारी को देरी से वेतन देने, उनके काम में नुक्ताचीनी की जाती है। ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन, डीटीसी का निजीकरण करना चाहती है, जो कर्मचारियों को बेरोजगार व गरीब, मध्यम वर्ग के लिए भारी पड़ेगा।
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