इनमें से एक पटेल, एक दलित व एक मुस्लिम चेहरा हैं
बलिराम सिंह, लखनऊ
पिछले एक महीने के दौरान तीन बड़े चेहरे सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी आज़ाद समाज पार्टी से जुड़े हैं. इनमें से एक ओबीसी (कुर्मी), एक दलित और एक मुस्लिम समाज से हैं. इनमें दो चेहरों का भाजपा और कांग्रेस से मोहभंग हो गया. ये चेहरे हैं- पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ मसूद और सेवानिवृत पुलिस अधिकारी प्रेम प्रकाश। इनके अलावा डॉ राकेश वर्मा आईएएस की नौकरी छोड़ कर राजनीति में उतरे हैं।

बहुजन समाज पार्टी की पहली सरकार में शिक्षा मंत्री व राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ. मसूद अहमद का जुलाई में कांग्रेस से मोहभंग हो गया. उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर सांसद चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) तथा अन्य दलों के सैकड़ों पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक भी पार्टी में शामिल हैं।
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने डॉ. मसूद अहमद का स्वागत करते हुए कहा कि उनका पार्टी में शामिल होना केवल एक नेता का आगमन नहीं, बल्कि बहुजन आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा देने वाला कदम है।

उन्होंने कहा कि डॉ. मसूद अहमद मान्यवर कांशीराम के पुराने सहयोगी रहे हैं और सामाजिक न्याय की राजनीति का लंबा अनुभव रखते हैं। उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का लाभ आजाद समाज पार्टी को मिलेगा।

सेवानिवृत्त आईपीएस प्रेम प्रकाश:
आप उत्तर प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर जाने जाते हैं. दिल्ली के रहने वाले प्रेम प्रकाश दलित समाज से हैं.
हालांकि रिटायरमेंट के बाद पिछले साल आपने बीजेपी जॉइन की, लेकिन साल भर में ही आपका बीजेपी से मोहभंग हो गया और आज़ाद समाज पार्टी में शामिल हो गए. चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में आप चुनाव लड़ेंगे. आप एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी चर्चित रहे है.
डॉ राकेश वर्मा, पूर्व आईएएस:
देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ कर राजनीति में आने वाले डॉ राकेश वर्मा पिछड़ा वर्ग (कुर्मी) से आते हैं. पिछले दिनों आपने भी आज़ाद समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.
लगभग तीन दशक तक का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले डॉ राकेश वर्मा के आने से आज़ाद समाज पार्टी को विभिन्न ज्वलंत विषयों पर रणनीति बनाने में लाभ मिलेगा.
आईएएस की नौकरी छोड़ने (वीआरएस) के बाद कुछ दिनों तक आप राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सलाहकार के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई. आप कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं.
सदस्यता ग्रहण कराने के बाद पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि तीन दशक से अधिक का प्रशासनिक अनुभव, सामाजिक न्याय के प्रति गहरी समझ और वैचारिक प्रतिबद्धता रखने वाले डॉ. राकेश वर्मा का पार्टी में शामिल होना सामाजिक न्याय के आंदोलन की वैचारिक तथा संगठनात्मक शक्ति को नई ऊर्जा देगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. वर्मा का अनुभव पार्टी को जनहित के मुद्दों पर और अधिक प्रभावी बनाएगा।
कांग्रेस छोड़ कर आज़ाद समाज पार्टी में डॉ मसूद के शामिल होने के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं सामाजिक चिंतक पटेल रामेश्वर पवन, प्रदेश अध्यक्ष पूर्व एमएलसी सुनील चित्तौड़, राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य मोहम्मद आकिब, प्रदेश महासचिव यशवंत मौर्य, राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य सतपाल चौधरी समेत पार्टी के जिम्मेदार साथी मौजूद रहे..
*डॉ. मसूद अहमद का राजनीतिक सफर*
डॉ. मसूद अहमद उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जनपद के पृथ्वीपुर (हंसवर) के निवासी हैं। वे बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक नेताओं में रहे हैं और वर्ष 1993 में टांडा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री बने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उन्होंने लंबे समय तक मान्यवर कांशीराम के साथ बहुजन आंदोलन को मजबूत करने का कार्य किया। बाद में उन्होंने पूर्व विधायक अरशद खान के साथ नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी (NLP) की स्थापना की। इसके पश्चात वे राष्ट्रीय लोकदल (RLD) में शामिल हुए और वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। वर्ष 2022 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा, लेकिन अब सामाजिक न्याय, बहुजन एकता और संवैधानिक मूल्यों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) में शामिल होने का निर्णय लिया है।
आजाद समाज पार्टी को मिलेगा संगठनात्मक बल:
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डॉ. मसूद अहमद जैसे अनुभवी नेता, प्रेम प्रकाश जैसे सीनियर आईपीएस और डॉ.राकेश वर्मा जैसे तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी के पार्टी में शामिल होने से आजाद समाज पार्टी को कई स्तरों पर मजबूती मिलेगी। इन चेहरों का चार दशकों से अधिक का राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक समझ और प्रदेशव्यापी संगठनात्मक नेटवर्क पार्टी को नई रणनीतिक क्षमता प्रदान करेगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के दलित- पिछड़े -अल्पसंख्यक समाज और बहुजन विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ने की संभावना है।
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