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उत्तर प्रदेश

धरना पर बैठे निदेशालय कर्मचारी, निदेशक पर लगाया बड़ा आरोप

डिजिटल इंडिया के युग में 19वीं सदी की खटारा टाइप मशीनों पर वरिष्ठ कर्मियों की परीक्षा थोपना बंद करे स्थानीय निकाय निदेशालय: मनोज कुमार सिंह

युवा तुर्क, लखनऊ

उत्तर प्रदेश फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विस एसोसिएशन्स के प्रांतीय अध्यक्षक संदीप कुमार पांडेय एवं मनोज कुमार सिंह अध्यक्ष निदेशक निदेशालय मिनिस्टीरियल संघ के नेतृत्व में आज स्थानीय निकाय निदेशालय प्रांगण में विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

ज्ञापन

धरने को संबोधित करते हुए प्रांतीय महामंत्री मंसूर अली ने निदेशालय प्रशासन की दमनकारी नीतियों और तानाशाही रवैये पर तीखा प्रहार किया। मंसूर अली ने कहा कि जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी पूरे प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली, डिजिटल कार्य प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अत्याधुनिक तकनीक को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं, दूसरी ओर नगर निकाय निदेशालय के कुछ द्वेषी अधिकारी कंप्यूटर पर काम कर रहे वरिष्ठ बाबुओं को जबरन 19वीं सदी की पुरानी मैन्युअल टाइप मशीनों पर धकेल रहे हैं। फेडरेशन के प्रांतीय महामंत्री ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि निदेशालय की एक महिला अधिकारी की मिलीभगत से नियमों और शासनादेशों की गलत व्याख्या की गई। उत्तर प्रदेश कार्मिक अनुभाग-2 की अधिसूचना दिनांक 29 सितंबर, 2025 का गलत हवाला देकर, निदेशालय द्वारा 25 अगस्त, 2026 को पत्र संख्या एक/683 से एक/692 जारी किए गए। इन अवैध आदेशों के तहत, वर्ष 1997 से पूरी निष्ठा से काम कर रहे और वर्तमान में दो-तीन पदोन्नतियां पाकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत आलोक गोयल जैसे राजपत्रित समकक्ष कर्मियों को भी पारंपरिक टाइप मशीन पर टंकण परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि हमारे वरिष्ठतम अधिकारियों का मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान है। मंसूर अली ने स्पष्ट किया कि कार्मिक विभाग की यह अधिसूचना दिनांक 29-09-2025 के बाद होने वाली नई नियुक्तियों पर प्रभावी है, न कि 30 साल पुराने नियमित कर्मचारियों पर। इसके बावजूद, राजकीय आईटीआई अलीगंज से गुपचुप सांठगांठ कर पुरानी टाइप मशीनें मंगवाई गईं और अपराधियों की तरह कर्मचारियों की “अनवरत वीडियोग्राफी” कराने का तुगलकी फरमान जारी किया गया, जो अत्यंत निंदनीय है।

मुख्य मांगें:
दिनांक 25 अगस्त, 2026 को जारी समस्त अवैध एवं नियम-विरुद्ध टंकण परीक्षा संबंधी आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त/शून्य घोषित किया जाए।
शासनादेश संख्या 9/2022/सामान्य-145 दिनांक 17 मई, 2022 का अनुपालन करते हुए निदेशालय संघ के पदाधिकारियों के साथ तत्काल द्विपक्षीय वार्ता सुनिश्चित की जाए।
गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Bill) और रोके गए वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए।निदेशालय में पिछले कई वर्षों से लंबित कैडर पुनर्गठन की पत्रावली को तत्काल आगे बढ़ाकर पदों को सृजित किया जाए।
प्रांतीय महामंत्री मंसूर अली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद जी ने भी दिनांक 7 सितंबर, 2026 (संदर्भ संख्या: CBS0000607411) को इस मामले में निदेशालय को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया था, लेकिन अफसरशाही अपनी हठधर्मिता पर अड़ी है। यदि आगामी तीन दिनों के भीतर इन दमनकारी आदेशों को वापस नहीं लिया गया, तो फेडरेशन पूरे उत्तर प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों में “पूर्ण कार्य बहिष्कार और उग्र आंदोलन” का शंखनाद कर देगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। धरने में उ०प्र० राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मीना सिंह , निदेशालय मिनिस्टीरियल सेवा संघ के अध्यक्ष, संदीप कुमार पाण्डेय (प्रांतीय अध्यक्ष), सुनील कुमार यादव (कार्यकारी अध्यक्ष) शैलेंद्र यादव , आशीष खरे, अफजल फारूकी , रंजीत कुमार , देवेंद्र कुमार यादव सहित सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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