सबसे ज्यादा मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज तमिलनाडु में व सर्वाधिक घटनाएं यूपी में
युवा तुर्क, लखनऊ
देश में सबसे ज्यादा मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज तमिलनाडु में हैं, लेकिन रैंगिंग के नाम पर सबसे ज्यादा उत्पीड़न की घटनाएं उत्तर प्रदेश में घटित हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरारी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कड़े नियमों के बावजूद पिछले पांच वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश के मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की 825 शिकायतें दर्ज की गई हैं। ये आंकड़े वर्ष 2022 से 22 जुलाई 2026 तक के बीच के हैं।
इन आंकड़ों में वर्ष 2026 में 22 जुलाई तक 135 शिकायतें शामिल हैं। यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है। कड़े नियमों के बावजूद रैगिंग की बढ़ती घटनाओं से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 22 जुलाई 2026 तक देश भर में कुल 4024 रैगिंग की शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर है। इसके बाद प. बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार का स्थान है। उत्तर प्रदेश की तुलना अन्य राज्यों से करें तो तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या अधिक है। बावजूद इसके इन राज्यों में रैगिंग की शिकायतें उत्तर प्रदेश की अपेक्षा काफी कम है।
107 संस्थानों को नोटिस:
वर्ष 2025 में यूजीसी ने रैगिंग रोकने में विफल रहने पर 18 मेडिकल कॉलेजों समेत 107 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी।
राज्यवार रैगिंग की शिकायतें दर्ज:
राज्य – वर्ष 2022 – 2023 – 2024 – 2025 – 2026
उत्तर प्रदेश- 97 – 154 – 188 – 251 – 135
मध्य प्रदेश – 73 – 82 – 87 – 117 – 63
राजस्थान – 32 – 42 – 54 – 75 – 44
दिल्ली – 18 – 26 – 31- 33- 27
उत्तराखंड- 19- 28- 25- 49- 21
हरियाणा – 8- 22 – 28 -48 -19
पंजाब- 18 -9 – 22 -25 -13
जम्मू-कश्मीर- 15 -18 – 14- 17- 6
हिमाचल प्रदेश- 5- 12- 9- 14- 4
चंडीगढ़- 0- 1- 0- 1- 2
ये राज्य बने नजीर:
रिपोर्ट के अनुसार, सिक्किम, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर ने रैगिंग रोकने के मामले में नजीर पेश की है। इन राज्यों में पहली शिकायत प्रकाश में आते ही प्रशासन, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समूहों ने मिलकर तेजी से काम किया। इसके अलावा सीनियर और जूनियर छात्रों के बीच बेहतर संवाद स्थापित किया गया। साथ ही, 11वीं और 12वीं कक्षा से ही छात्रों को रैगिंग विरोधी कानूनों के बारे में जागरूक किया गया। जिसकी वजह से इन राज्यों में रैगिंग की शिकायतें शून्य हो गईं।
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