आत्म सम्मान आंदोलन के 100 वर्षों के इतिहास में अर्जक संघ का महत्वपूर्ण योगदान – जी.करूणानिधि
युवा तुर्क, लखनऊ
लखनऊ के गांधी भवन के करन भाई सभागार में अर्जक संघ का 59वां स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के तौर पर तमिलनाडु सरकार के आंतरिक मामलों के सचिव जी. करूणानिधि ने सम्बोधित करते हुए कहा कि पेरियार ई.वी.रामास्वामी नायकर के आत्मसम्मान आंदोलन के 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।
इस आंदोलन के सामानांतर उत्तर भारत में अर्जक संघ ने महत्वपूर्ण काम किया है।

करूणानिधि ने कहा कि आज सामाजिक व सांस्कृतिक कारणों से देश की बड़ी तादाद वाली आबादी को विभिन्न मानकों पर दोयम दर्जे की जिंदगी को जीने को मजबूर हैं।
प्रसिद्ध लेखक विद्या भूषण रावत ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अम्बेडकर और पेरियार की मानवतावादी विमर्श को समाज में उतारने में अर्जक संघ का महत्वपूर्ण योगदान है।

चित्रकार और संस्कृतिकर्मी डा.लाल रत्नाकर ने कहा कि अर्जक संघ ने सांस्कृतिक वर्चस्ववाद के खिलाफ क्रांतिकारी चुनौती दी। आज सांस्कृतिक वर्चस्ववाद को रोकना व खत्म करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रो.रीता चौधरी ने कहा कि अर्जक संस्कृति ने महिलाओं को नैसर्गिक न्याय व अधिकार के पक्ष में है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्जक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार भारती ने की।
इस अवसर पर कार्यक्रम में वैज्ञानिकवादी, मानवतावादी सांस्कृतिक चेतना को गति प्रदान करने पर चर्चा हुई।
अर्जक संघ का मानना है कि रोजगार,धन,धरती पर आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी हो।
कार्यक्रम का संचालन डा.दिलीप गौतम ने किया।
इस अवसर डा.अनूप पटेल, मनोज पासवान, चन्द्रभान यादव, कामरेड राहुल यादव, सुनील वर्मा, मुरली मनोहर कनौजिया, श्यामू चौधरी, भागवत पटेल, हरीश गंगवार, अनिल यादव मास्टर, आलोक यादव, कपिल भार्गव, हरीश, ब्रजेश समेत सैकड़ों लोग शामिल रहे.
