निदेशालय संघ ने निदेश को पत्र लिखकर किया अनुरोध
युवा तुर्क, लखनऊ
काम का बोझ, अवकाश स्वीकृत न होना, चिकित्सकीय अवकाश स्वीकृत न हो पाने के कारण वेतन आहरित न होने जैसी समस्याओं से नगरीय निदेशालय के कर्मचारी जूझ रहे हैं। इन समस्याओं की वजह से ये कर्मचारी तनाव में रह रहे हैं और इनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय निदेशालय मिनिस्टीरियल सेवा संघ के पदाधिकारियों ने निदेशक को पत्र लिखकर अनुरोध किया है।

पत्र के माध्यम से महामंत्री अफजल फारुकी ने निदेशक को सूचित किया है कि निदेशालय में कर्मचारियों की कमी के कारण कार्य का बोझ काफी बढ़ गया है। एक-एक पटल सहायक को 2 से 3 पटलों का कार्य आवंटित किया गया है।
सभी कर्मचारी अपनी लगन, मेहनत से कार्य भी कर रहे हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत समस्याएं जैसे अवकाश स्वीकृत न होना, चिकित्सकीय अवकाश स्वीकृत न हो पाने के कारण वेतन आहरित न होना, चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान के प्रकरणों का लंबित रहना, जो कि निदेशालय स्तर से ही निस्तारित होने हैं। उन समस्याओं का भी समसय निस्तारण न हो पाने के कारण कर्मचारी चिंतित है।
निदेशक कैम्प के माध्यम से पूर्व में यह अवगत कराया गया था कि निदेशालय संघ द्वारा प्रेषित मांग पत्र दिनांक 20 फरवरी 2026 को निदेशक महोदय द्वारा संज्ञान लेते हुए दिनांक 27 फरवरी को निदेशालय अधिकारी एवं संघ के पदाधिकारी- कर्मचारियों को वार्ता हेतु आमंत्रित किया गया, परंतु बैठक आहूत नहीं की गई।

पत्र में आगे लिखा गया है, “शासनादेश संख्या 12-2022-487 सं-सैतालिस-4- 2022 (1-3-96) दिनांक 27 जुलाई 2022 द्वारा समस्त विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि 3 वर्ष से अधिक समय से एक ही पटल पर कार्यरत प्रत्यक्ष –अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कार्मिकों का पटल परिवर्तन किए जाने के संबंध में सूचना अपने प्रशासनिक विभाग के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर कार्मिक विभाग को अवश्य उपलब्ध कराएं।“
मजे की बात यह है कि स्थानांतरण सत्र 2025-26 में प्रदेश के निकायों में 3 वर्ष से अधिक समय से केंद्रीयत संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों का स्थानांतरण तो किया गया, परंतु निदेशालय के कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया गया।
संघ ने मांग की है कि वर्तमान स्थानांतरण सत्र 2026-27 में निदेशालय में 3 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत एक ही पटल पर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से कार्यरत कर्मचारियों को अन्यत्र पटल पर स्थानांतरित किया जाए।
कर्मचारियों को अन्य पटल पर स्थानांतरित किया जाए, जिससे प्रत्येक कर्मचारी को समानता के स्वरूप कार्य सीखने-समझने का अवसर प्राप्त हो सके।
निदेशालय के ऐसे कर्मचारी जिनका वेतन अवकाश संबंधी प्रार्थना पत्रों पर ससमय विचार न करने के कारण वेतन आहरण नहीं किया गया है, उन कार्मिकों के अवकाश संबंधी प्रार्थना पत्रों पर विचार करते हुए अवकाश स्वीकृत कराते हुए वेतन आहरित कराया जाए। कार्य की अधिकता देखते हुए केंद्रीयित अकेंद्रीयित सेवा के कम से कम 10 कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं 5 आशुलिपिक को निदेशालय से संबंद्ध किया जाए एवं वर्तमान में अधिकारियों के साथ लगे हुए कम्प्यूटर आपरेटरों को विभिन्न अधिष्ठानों पर सहयोग हेतु लगाया जाए।
संघ ने यह भी कहा है कि अभी हाल में ही निदेशालय के 1 कनिष्ठ सहायक कैश अनुभाग को बिना उसकी गलती के उसका पक्ष सुने बिना ही एक अधिकारी की झूठी व मनगढ़ंत आख्या के आधार पर निलंबित कर दिया गया।
इससे हम सभी कर्मचारी निराशाजनक एवं हतोत्साहित हैं। एक- एक पटल सहायक के पास 2 से 3 पटलों का अधिष्ठान संबंधी कार्य हैं, कार्य का बोझ एवं मानसिक दबाव के कारण उनकी कार्यशैली एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकार के तानाशाही रवैये से कर्मचारी आक्रोशित है।
प्रत्येक माह हो बैठक:
निदेशालय संघ ने अनुरोध किया है कि शासनादेश संख्या 9-2022-समान्य-145-सैतालीस –का-4 -202-2ईएस-2009 दिनांक 17 मई 2022 में व्यवस्था प्रदत्त है कि विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ विभाग के संगठन पदाधिकारियों के साथ संघ द्वारा की गई मांगों एवं विभागीय कार्मिकों की समस्याओं के निस्तारण के लिए वह प्रत्येक माह संगठन के पदाधिकारियों से सकारात्मक वार्ता करेंगे। इस बाबत दिनांक 24 अक्टूबर 2024 को संघ पदाधिकारी-कर्मचारियों के साथ बैठक आहूत की गई। लेकिन इसके पश्चात लगभग 2 वर्ष का समय व्यतित हो जाने के बाद भी आप द्वारा दिए गए निर्देश के बावजूद समस्याओं की स्थिति जस की तस है। अत: अनुरोध है कि संघ द्वारा प्रेषित पूर्व की मांग पत्रों का संज्ञान लेते हुए उन समस्याओं का निराकरण कराने हेतु वार्ता हेतु समय प्रदान करने की कृपा करें।
पढ़ते रहिए युवा तुर्क: सोनभद्र के आदिवासी इलाकों में बुनियादी समस्याओं का अंबार


