समुद्री मार्ग से पहली बार किया गया मखाना का निर्यात
दरभंगा के किसानों से सीधे खरीदा गया 18 मीट्रिक टन मखाना
युवा तुर्क, नई दिल्ली
बिहार के मखाने ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जीआई टैग वाले मिथिला मखाने की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप बिहार से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। 18 मीट्रिक टन मखाने की यह खेप बियाडा औद्योगिक क्षेत्र, बिहटा से रवाना हुई। मखाना दरभंगा जिले के किसानों से सीधे खरीदा गया, जिससे उन्हें बाजार दर की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक मूल्य मिला। खेप को बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रवाना किया। इस मौके पर उद्यान निदेशक, एपीडा के अधिकारी, निर्यातक, लॉजिस्टिक्स पार्टनर और मखाना उत्पादक मौजूद रहे।

यह खेप एनआईएडी ग्रीन ने निर्यात की, जबकि लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी जितबान सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने संभाली। मखाने की पैकिंग बिहटा स्थित बियाडा औद्योगिक क्षेत्र में की गई।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना बिहार की पहचान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार के निर्यातकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। उन्होंने वैश्विक बाजार के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार मखाना उत्पादकों, प्रोसेसर और निर्यातकों को लगातार सहयोग दे रही है।
एपीडा ने बिहार सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से इस निर्यात को सुगम बनाया। एपीडा मखाना निर्यात को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण, बाजार विकास और निर्यात सुविधा के क्षेत्र में काम कर रहा है।
बता दें कि बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में करीब 85 प्रतिशत योगदान देता है। जुलाई 2025 से मखाने के लिए अलग एचएस कोड भी प्रभावी हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित उत्पादों का 20 से अधिक देशों में निर्यात किया।
ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली समुद्री खेप बिहार के मखाने की बढ़ती वैश्विक मांग और किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पढ़ते रहिए युवा तुर्क: उपेंद्र कुशवाहा ने अजय कुशवाहा को दी पूर्वी यूपी की कमान


