रामाशीष राय ने कहा- संवैधानिक संस्थानों पर हो रहे हमले से खतरे में लोकतंत्र
युवा तुर्क, लखनऊ
विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को झटका लगा है। रालोद के यूपी अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी रामाशीष राय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे में उन्होंने अपनी ही पार्टी की नीतियों पर इशारों में कई आरोप लगाए हैं। किसानों और नौजवानों की बात कहते हुए उनकी समस्याओं को उठाया है।

रामाशीष राय ने जय प्रकाश नारायण औऱ अटल बिहारी वाजपेयी के अह्वानों की चर्चा करते हुए लिखा कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र खतरे में है। रामाशीष राय के इन आरोपों से कयास लगाया जा रहा है कि वह समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं। अगला विधानसभा चुनाव भी लड़ने की तैयारी है।
रामाशीष ने अपने इस्तीफा में लिखा है कि मैं राजनीति में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़ा था। उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण और शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे प्रश्न राष्ट्रीय चिंता के विषय थे।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने “संपूर्ण क्रांति” का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना देश के सामने रखा था, वह आज भी अधूरा प्रतीत होता है। भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है। समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है। नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा जनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है।
संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र आज खतरे में है। व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश, इन्हीं वैचारिक और नैतिक कारणों से राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।
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