राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन में उपेन्द्र कुशवाहा पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित
युवा तुर्क, नई दिल्ली
वर्तमान कॉलेजियम व्यवस्था की समीक्षा तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर भारतीय न्यायिक सेवा (Indian Judicial Service – IJS) का गठन किया जाए। यह मांग राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने की है। रविवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राष्ट्रीय अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन में सर्वसम्मति से पार्टी के संस्थापक उपेन्द्र कुशवाहा को आगामी कार्यकाल (2026-29) के लिए पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। राष्ट्रीय निर्वाचन पदाधिकारी प्रमोद कुमार सुमन ने उपेन्द्र कुशवाहा को प्रमाण पत्र सौप कर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर पुन निर्वाचन की घोषणा की।

अधिवेशन में देश की वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों पर व्यापक चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए गए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हुए विकास कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
अधिवेशन ने बिहार के विकास में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में अभी और व्यापक कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
पार्टी ने बिहार में युवाओं के पलायन को रोकने तथा कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु
वर्तमान कॉलेजियम व्यवस्था की समीक्षा तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर भारतीय न्यायिक सेवा (Indian Judicial Service – IJS) के गठन की मांग दोहराई।
पार्टी ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए।
अधिवेशन में वर्ष 2026 में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। पार्टी ने मांग की कि लोकसभा सीटों का निर्धारण वास्तविक जनसंख्या के आधार पर किया जाए तथा बिहार जैसे राज्यों को उनका न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों को उनकी वर्तमान जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई।
सांस्कृतिक प्रस्तावों के अंतर्गत पार्टी ने पटना का नाम पुनः “पाटलिपुत्र” किए जाने, क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) को राष्ट्रीय स्तर पर “महिला शिक्षा दिवस” घोषित करने तथा जननायक कर्पूरी ठाकुर की आदमकद प्रतिमा संसद परिसर में स्थापित करने की मांग की।
अधिवेशन ने बिहार के लिए विशेष आर्थिक पैकेजों की निरंतरता, कृषि आधारित उद्योगों के विकास तथा राज्य में रोजगार सृजन को लेकर केंद्र सरकार से ठोस पहल करने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने संकल्प व्यक्त किया कि पार्टी सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, किसानों के हित तथा बिहार के समग्र विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।
पढ़ते रहिए युवा तुर्क: नवंबर-दिसंबर में यूपी सहित पांच राज्यों में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव


