बीएचयू के पत्रकारिता विभाग में चंद्रशेखर के नाम पर शोधपीठ स्थापित होगी
युवा तुर्क, बलिया
देश में वैचारिक पत्रकारिता और जनसरोकारों की राजनीति के कमजोर पड़ते दौर में पूर्व प्रधानमंत्री एवं ‘यंग इंडियन’ के संपादक रहे चंद्रशेखर की पत्रकारिता और चिंतन की प्रासंगिकता पर 28 मई को बलिया जनपद के नगर के टाउन हॉल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विस्तार से चर्चा हुई। जन्मशताब्दी वर्ष के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने चंद्रशेखर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने कहा कि चंद्रशेखर ने पत्रकारिता को केवल समाचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे वैचारिक हस्तक्षेप का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि आज विचार आधारित राजनीति और पत्रकारिता दोनों चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही हैं। ऐसे समय में चंद्रशेखर जैसे पत्रकार और नेता की आवश्यकता देश को महसूस हो रही है।

‘चंद्रशेखर की पत्रकारिता दृष्टि’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रो. डॉ. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता में गांधी के स्वराज की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। उनके लेखन का केंद्र समाज का अंतिम व्यक्ति, कुपोषण, बेरोजगारी और ग्रामीण भारत की समस्याएं थीं। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर की लेखनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी अपने समय में थी।
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर सत्ता से सवाल पूछने वाले निर्भीक पत्रकार थे। वहीं वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी पत्रकारिता का केंद्र गरीब और वंचित वर्ग था। सरल भाषा में गंभीर विषयों को रखने की कला उन्हें विशिष्ट बनाती थी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने कहा कि चंद्रशेखर ने पत्रकारिता और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उच्च आदर्श स्थापित किए। उन्होंने बीएचयू के पत्रकारिता विभाग में चंद्रशेखर के नाम पर शोधपीठ स्थापित करने की दिशा में पहल करने की घोषणा की।
कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा सांसद नीरज शेखर एवं एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू ने वरिष्ठ पत्रकारों और वक्ताओं को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
संगोष्ठी में वरिष्ठ बुद्धिजीवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्याम जी त्रिपाठी, चंद्रशेखर जन्मशताब्दी वर्ष समारोह समिति के अध्यक्ष श्यामबहादुर सिंह, योगेंद्र सिंह, कमलेश सिंह, राणा प्रताप सिंह, संत कुमार मिठाई लाल गुप्त, चंद्रशेखर सिंह, यशपाल सिंह, अनिल सिंह, मनोरंजन सिंह, अजय उपाध्याय, उमाशंकर सिंह, अजय सिंह, सुशील कुमार पांडेय ‘कान्ह जी’, अरविंद शुक्ल समेत बड़ी संख्या में पत्रकार, शिक्षाविद, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्यामबहादुर सिंह तथा संचालन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अखिलेश सिन्हा ने किया। स्वागत भाषण पूर्व प्रमुख अनिल सिंह ने दिया।
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