अखिलेश यादव ने कहा- बीजेपी सरकार आरक्षण में मचा रही लूट
युवा तुर्क, लखनऊ
“आरक्षण का मिशन अधूरा,
अखिलेश यादव करेंगे पूरा।“
यह नारा बुधवार को समाजवादी पार्टी की पीडीए ऑडिट को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान गूंजा। इस दौरान समाजवादी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वो अपने पुराने फॉर्मूले पर काम करेगी। इस प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव के अलावा डिंपल यादव, शिवपाल यादव और सांसद इकरा हसन समेत सपा के कई सांसद मौजूद रहे।

इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वो पीडीए यानि पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक को न केवल साथ लेकर चलेंगे, बल्कि उनके आरक्षण के अधिकारों को पूरा करने को लेकर गंभीर हैं। राज्य में उनकी सरकार बनती है तो सरकार बनने के पहले 90 दिनों के भीतर 69,000 शिक्षक भर्ती को न्याय दिलाने का काम करेंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि नौकरी में आरक्षण मार रहे हैं ये लोग। सबसे पहले 69000 शिक्षक भर्ती को विषय को लिया है। इन लोगों ने बहुत संघर्ष किया। कोई ऐसा स्थान नहीं छोड़ा, जहां पर इन्हें न्याय न मिल जाए।
बीजेपी के नेताओं के समक्ष अपनी बात रखने के पूरे प्रयास किए हैं। 69000 शिक्षक भर्ती 2019 में संवैधानिक आरक्षण मिलना चाहिए 27 प्रतिशत, लेकिन मिला है 3.86 प्रतिशत, जो लूट हुई है वो है 23.14 प्रतिशत।
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में सबको मिलाकर जो लूट हुई है उसका आंकड़ा 20 हजार सीटों का है। इसे खुद यूपी सरकार ने स्वीकार किया है कि शिक्षक भर्ती में आरक्षण की लूट हुई है।
सपा प्रमुख ने बीजेपी को चुनौती दी कि आंकड़े गलत हो तो सही कर दें।
अखिलेश यादव ने इस दौरान पीडीए को मिलने वाले आरक्षण में लूट के आंकड़े पेश किए हैं। अखिलेश ने कई भर्तियों में आरक्षण में लूट की भर्ती के उदाहरण दिए।
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, “अभी एक राज्य में बीजेपी की सरकार बनी है उसने वंहां ओबीसी आरक्षण को 17 से 7 प्रतिशत कर दिया है।
अखिलेश यादव ने पीएम मोदी के खर्च में कटौती की अपील पर भी तंज कसते हुए कहा, “अर्थव्यवस्था वो अच्छी होती है, जिसमें ज्यादा पैसा खर्चा हो। सरकार न पैसा कमाने दे रही है और न खर्च करने दे रही है, इसलिए नौकरियां खत्म कर रही है।“
सपा प्रमुख ने कहा कि हम 90 दिन में जातिगत जनगणना कराकर दिखा देंगे। अखिलेश ने कहा, “आरक्षण को नकारने की वजह क्या है? पिछले 5 हजार साल में 2 बड़ा विभाजन रहा है वर्चस्ववादी और वंचित लोग।
वर्चस्ववादी और वंचित वर्ग के बीच 5 फीसदी और 95 फीसदी का अनुपात रहा है। इन्हें बराबरी पर लाने के लिए बाबा साहब ने आरक्षण की व्यवस्था की, जो 2014 तक सुचारू रूप से चली. 2014 में जब छलावे वाली सरकार आई तब जो लोग अंडर ग्राउंड लोग ओवर ग्राउंड होने लगे।
सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी की कोशिश तो कोर्ट रूपी थर्ड अंपायर को भी मैनेज करने की रहती है। बीजेपी नहीं चाहती सबको बराबरी का मौका मिले।
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