बेटी ने कहा था- आरोपी के घर बुलडोजर चले, तभी दूंगी मुखाग्नि
भाई की स्थिति नाजुक, वेंटिलेटर पर
युवा तुर्क, बेल्थरारोड
बलिया जनपद के उभांव थाना क्षेत्र के सोनाडीह (दोथ) गांव में चाकूबाजी में जान गंवाने वाले पूर्व सीआरपीएफ जवान अमरेश बहादुर सिंह का शव करीब 20 घंटे तक घर में अंतिम संस्कार का इंतजार करता रहा। परिवार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग पर अड़ा था। प्रशासन की ओर से मांगों पर हरसंभव कार्रवाई और मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा मिलने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की। अंततः मृतक के 10 वर्षीय भतीजे रुद्र प्रताप सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।

शुक्रवार को मऊ से शव घर पहुंचने के बाद मृतक की पत्नी कंचन सिंह और बेटियां कार्रवाई की मांग को लेकर अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं थीं।
बड़ी बेटी कृतिका सिंह ने पुलिस अधिकारियों के सामने स्पष्ट कहा था कि जब तक आरोपी के घर पर बुलडोजर नहीं चलेगा, वह पिता को मुखाग्नि नहीं देगी। परिवार ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग भी उठाई थी।

आंखों के सामने पिता पर हुआ हमला:
कृतिका ने एसपी ओंमकार सिंह को घटना की जानकारी देते हुए बताया था कि गुरुवार रात रामकरण सिंह उनके परिवार के लोगों को गाली दे रहा था। विरोध करने पहुंचे चाचा मंजेश सिंह पर आरोपी ने चाकू से हमला कर दिया।
चाचा को बचाने पहुंची कृतिका के साथ भी अभद्रता और कपड़े खींचने का आरोप लगाया गया। इसी दौरान अमरेश बहादुर सिंह बीच- बचाव करने पहुंचे तो उन पर भी चाकू से हमला कर दिया गया। अंधेरा होने के कारण कृतिका और उसकी बहन रितिका चीखती-चिल्लाती रहीं। उनकी आंखों के सामने पिता व चाचा गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। इलाज के दौरान मऊ में उनकी मौत हो गई। वहीं घायल मंजेश सिंह को गंभीर हालत में बीएचयू वाराणसी रेफर किया गया है।
परिवार बोला- एक कमाऊ सदस्य भी चला गया:
पति की मौत के बाद पत्नी कंचन सिंह ने आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर बुलडोजर चलाने व एनकाउंटर करने की मांग की। उन्होंने परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता की भी मांग की।
उनका कहना था कि अमरेश परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
परिजनों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिवार से बातचीत करते रहे। एडीएम अनिल कुमार ने बताया कि मृतक की पत्नी का मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है और उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की बात कही है।
परिवहन मंत्री और डीएम से भी बातचीत हुई है। परिवहन मंत्री के एक-दो दिन बाद क्षेत्र में आने की संभावना है, इस दौरान उनकी सुविधानुसार परिवार से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया गया।
बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा का भी भरोसा:
एडीएम ने बताया कि परिवार को कानून पर भरोसा रखने के साथ सुरक्षा का भी पूरा भरोसा दिया गया है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और कोचिंग समेत परिवार की जरूरी मांगों को पूरा कराने का आश्वासन भी दिया गया। प्रशासन के इस भरोसे के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई।
तीन आरोपी हिरासत में, दो की तलाश
मृतक की पुत्री की तहरीर पर रामकरण सिंह समेत पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई है। पुलिस ने नामजद पांच आरोपियों में से तीन को हिरासत में लिया है, जबकि दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस निगरानी भी बनाए हुए है।
करीब 20 घंटे तक घर में रखे शव के बाद जब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई तो माहौल बेहद भावुक हो गया।
परिवार का सहारा रहे पूर्व सीआरपीएफ जवान की अंतिम विदाई में उनका छोटा भाई भी शामिल नहीं हो सका, क्योंकि वह फिलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
ऐसे में गुलौरा मठिया के शिव मंदिर के समीप सरयू नदी के तट पर उनके 10 वर्षीय बड़े बेटे रुद्र प्रताप सिंह ने अपने बड़े पिता को मुखाग्नि दी। पिता की मौत का गम, कार्रवाई की मांग और मासूम भतीजे के हाथों हुई अंतिम विदाई ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया।
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