संतोष साहनी, सोनभद्र
रक्षाबंधन के त्योहार के दौरान रोडवेज बसों में बढ़ी भीड़ के बीच टिकट बनाने को लेकर एक बस परिचालक पर की गई कार्रवाई का मामला सामने आया है। कंडक्टर ने आरोप लगाया कि वह लगातार यात्रियों के टिकट बना रहा था, इसी दौरान बस को रोककर उसके हाथ से टिकट और संबंधित कागजात ले लिए गए तथा करीब 1500 रुपये की डब्ल्यूडी कर दी गई।

वहीं, बस में सफर कर रहे यात्रियों ने भी कंडक्टर का पक्ष लेते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बस कंडक्टर के मुताबिक बस गाजीपुर से टेंगरामोड़ जा रही थी। नारायणपुर पहुंचने के बाद बस पूरी तरह भर गई थी। सीटें भर चुकी थीं और गैलरी में भी यात्री खड़े होकर सफर कर रहे थे। त्योहार के कारण बस में काफी भीड़ थी। कंडक्टर का कहना है कि वह लगातार यात्रियों के टिकट बना रहा था। कंडक्टर के अनुसार नारायणपुर में भी कुछ यात्री बस में सवार हुए। भीड़ अधिक होने और बस के लगातार चलते रहने के कारण करीब छह से आठ यात्रियों के टिकट उस समय तक नहीं बन पाए थे। वह उन यात्रियों का टिकट बनाने की प्रक्रिया में ही था, तभी टीआई ने बस रुकवा दी।
कंडक्टर का आरोप है कि उसने अधिकारी को बताया कि कुछ यात्रियों के टिकट बनाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उसके हाथ से टिकट और कागजात ले लिए गए और करीब 1500 रुपये की डब्ल्यूडी कर दी गई। उसका मार्गपत्र भी ले लिया गया। कंडक्टर ने कहा कि यदि उसकी गलती थी तो पूरी बस की जांच की जाती और दोषी पाए जाने पर वह कार्रवाई स्वीकार करता। कंडक्टर ने बताया कि वह आउटसोर्स कर्मचारी है और करीब 10 से 11 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करता है। ऐसे में 1500 रुपये की डब्ल्यूडी उसके लिए बड़ी राशि है। उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं यात्री भरत कुमार ने कंडक्टर का समर्थन करते हुए कहा कि टिकट बनाने में परिचालक की कोई गलती नहीं थी। वह यात्रियों के टिकट बना रहा था। यात्री के मुताबिक बस को जगह-जगह रुकवाया जा रहा था और काफी देर तक गाड़ी धीमी गति से चलती रही। यात्रियों का दावा है कि उनके पास घटना का वीडियो भी है और कई महिलाएं प्रत्यक्षदर्शी हैं। यात्रियों ने सवाल उठाया कि जब कंडक्टर टिकट बना रहा था तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

