नगर निकाय के 3500 कर्मियों के लिए मात्र 20 कर्मचारी
युवा तुर्क, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के नगर निकायों में कार्यरत केंद्रीयित सेवा के विभिन्न संवर्गों के 3500 कर्मचारियों का पेंशन, कोर्ट केस जैसे सारे कार्य मात्र 20 कर्मचारियों के हवाले हैं। इन 20 कर्मचारियों में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, 3 प्रशासनिक अधिकारी, 12 प्रधान सहायक एवं 4 कनिष्ठ सहायक तथा 3 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों में 3 वैयक्तिक सहायक, आशुलिपिक संवर्ग के कर्मचारी भी शामिल हैं।
ये कर्मचारी नगर निकायों के 3500 कर्मियों का अधिष्ठान, पेंशन, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, अधिकरण, सूचना आयोग सहित विभिन्न योजनाओं से संबंधित कार्य संपादित कर रहे हैं।

उ प्र स्थानीय निकाय निदेशालय मिनिस्टीरियल सेवा संघ के अध्यक्षा मनोज सिंह Manoj Singh कहते हैं कि संख्या बल अत्याधिक कम होने के बावजूद निदेशालय के पटल सहायकों द्वारा अपनी पूर्ण क्षमता एवं सत्यनिष्ठा के साथ शासकीय कार्यों का सम्पादन किया जाता है। निदेशालय के एक-एक पटल सहायक के पास कई-कई पटलों का कार्य आवंटित है, किंतु निदेशालय के कर्मचारियों की संख्या बल को बढ़ाए जाने, पुनर्गठन की दिशा में संघ के कई अनुरोधों के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जा रही है एवं इस प्रकरण को बार-बार डम्प कर दिया जा रहा है।

मनोज सिंह कहते हैं कि निदेशालय प्रत्येक अवकाश में खोल दिया जाता है, जबकि अधिकारीगण अपने आवास पर होते हैं और वहीं पर फाइलों को मंगाया जाता है। जिससे कर्मचारियों को मानसिक व आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

संघ के महामंत्री अफजल फारूकी कहते हैं कि निदेशालय में तैनात मृतक आश्रितों को टारगेट किया जा रहा है, निदेशालय में वर्तमान में कुल 20 कर्मचारी तैनात है, इनमें 13 कर्मचारी मृतक आश्रित के रूप में नियुक्त हुए हैं।
इन कर्मचारियों को बार-बार मृतक आश्रित कहकर संबोधित करते हुए अपमानित किया जा रहा है, जिससे यह लोग मानसिक रूप से काफी परेशान हैं।
संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक गोयल का यह भी आरोप है कि एक व्यक्तिक सहायक द्वारा दूषित मंशा से निदेशक महोदय को मिस गाइड करते हुए यह कार्य कराया जा रहा है। इनकी एक मात्र मंशा यही है कि निदेशालय में कार्यरत मृतक आश्रितों को पदोवनत अथवा सेवा समाप्त करते हुए उनके स्थान पर निकायों के केंद्रीयत अक्रेंद्रीयत कर्मचारियों को तैनात कर दिया जाए, जिससे उनकी दुकान चलती रहे।
व्यक्तिक सहायक द्वारा अक्सर निदेशक को यह कहकर भ्रमित किया जाता है कि निदेशालय में कोई बाबू काम नहीं करता है।
महोदय से अनुरोध सहित कहना है कि यदि निदेशालय के बाबू काम नहीं करते हैं तो निदेशालय के अधिकारीगण प्रत्येक वर्ष अपने एसीआर में कौन सा कार्य अंकित करते हैं।
इस प्रकार कार्य के दबाव तथा लगातार उत्पीड़न से सभी कर्मचारी अत्यधिक तनाव में कार्य कर रहे हैं। जिसका असर हमारे मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जिसके कारण हमारा पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है तथा शासकीय कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
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