युवा तुर्क, बलिया
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव व पूर्व जिलाध्यक्ष आद्या शंकर यादव ने कहा कि समाजवादी आंदोलन हमेशा सामाजिक न्याय, बराबरी और समता मूलक समाज की स्थापना के लिए संघर्ष करता रहा है। डॉ. राम मनोहर लोहिया के “जाति तोड़ो, समाज बनाओ” के विचार आज भी प्रासंगिक हैं, दुर्भाग्य है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी समाज में जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की मानसिकता पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन रहे पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind तक को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या तथा कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के साथ सार्वजनिक मंचों पर हुए व्यवहार को भी उन्होंने दलितों और पिछड़ों के अपमान से जोड़ते हुए चिंता व्यक्त की।
आद्या शंकर यादव ने कहा कि जब राष्ट्रपति और मंत्री पद पर बैठे लोगों के साथ भी भेदभावपूर्ण व्यवहार की चर्चा सामने आती है, तब आम दलित, पिछड़े और वंचित समाज की पीड़ा को आसानी से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी छुआछूत और गैर-बराबरी की मानसिकता मौजूद है, जिसे समाप्त करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, कर्पूरी ठाकुर, राम विलास पासवान, शरद यादव और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने सामाजिक न्याय और बराबरी की लड़ाई को हमेशा मजबूती दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में समाज से गैर-बराबरी खत्म होगी और समता मूलक समाज की स्थापना का सपना अवश्य साकार होगा।

