मानदेय व बहस फीस में 50 फीसदी हुई वृद्धि
युवा तुर्क, लखनऊ
चुनावी साल में योगी सरकार सरकारी वकीलों पर मेहरबान हुई है। योगी कैबिनेट ने बुधवार को सरकारी वकीलों के मानदेय और बहस फीस में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। योगी सरकार के इस फैसले से जिला स्तर से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक कार्यरत विधि अधिकारियों को लाभ मिलेगा।
कैबिनेट ने हर स्तर पर कार्यरत सरकारी वकीलों के मानदेय (रिटेनरशिप) और प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से उप जिला शासकीय अधिवक्ता से लेकर महाधिवक्ता तक लाभांवित होंगे।
सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक कार्य में तेजी आएगी और योग्य वकील सरकारी पक्ष रखने के लिए आकर्षित होंगे। कैबिनेट के इस फैसले से हजारों विधि अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
अब महाधिवक्ता को सवा लाख रुपए प्रति माह मानदेय और बहस फीस 60 हजार रुपए प्रति कार्यदिवस मिलेगा। इसी तरह अपर महाधिवक्ता उच्च न्यायालय को 50 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय और बहस फीस 40 हजार रुपए प्रति कार्यदिवस पर मिलेगा।
आपको बता दें कि अब तक जिला शासकीय अधिवक्ता को रिटेनरशिप फीस 9000 रुपये प्रति महीने और 1650 रुपए प्रति कार्यदिवस मिलता था। इसी तरह अपर जिला शासकीय अधिवक्ता को वर्तमान में 7200 रुपये रिटेनरशिप फीस व 1500 रुपये प्रति दिन बहस फीस, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता को 6300 रुपये रिटेनरशिप फीस और 1550 रुपये बहस फीस, उप जिला शासकीय अधिवक्ता की रिटेनरशिप फीस 5400 रुपये और बहस फीस 1275 रुपये मिलती थी।
महाधिवक्ता को रिटनेरशिप फीस 75000 रुपये महीने व बहस फीस प्रतिदिन 40000 रुपये और अपर महाधिवक्ता की रिटेनरशिप फीस 30000 रुपये और बहस फीस 20 हजार रुपये प्रतिदिन मिलती थी, जिसमें कैबिनेट ने वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
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