ताजा ख़बरें, Hindi News, delhi up news , Breaking Hindi News, Hindi Samachar, Latest Hindi News – yuvaaturk.com
उत्तर प्रदेश

श्रमिकों की हुंकार से गूंजी रेणुकूट औद्योगिक नगरी

प्रदर्शन

ठेका प्रथा मजदूरों के शोषण का सबसे बड़ा हथियार: डब्लू सिंह

युवा तुर्क, रेणुकूट, सोनभद्र

औद्योगिक नगरी रेणुकूट की सड़कों पर एक बार फिर मजदूरों का सैलाब उमड़ा। नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के भाई और टीम निशा के संरक्षक श्रमिक नेता विजय प्रताप सिंह (डब्लू सिंह) के नेतृत्व में मजदूरों ने फैक्ट्री के गेट से लेकर मुख्य सड़कों तक अपने अधिकारों के लिए हुंकार भरी। इस दौरान डब्लू सिंह ने वर्तमान श्रम परिस्थितियों की तुलना 140 साल पुराने ऐतिहासिक शिकागो आंदोलन से करते हुए सरकार और औद्योगिक प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी। 

Renukut
रेणुकूट में श्रमिकों ने किया जोरदार प्रदर्शन

मजदूरों और कर्मचारियों के विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए डब्लू सिंह ने कहा कि आज भारत में श्रमिकों की स्थिति वैसी ही हो गई है, जैसी 1886 में शिकागो के हे मार्केट आंदोलन के समय थी। कार्ल मार्क्स का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास खुद को दोहराता है, और आज भारत के औद्योगिक केंद्रों में मजदूरों के अधिकारों का दमन इसका जीता-जागता प्रमाण है। डब्लू सिंह ने वर्तमान श्रम नीतियों को पूरी तरह मजदूर विरोधी करार देते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं।

उन्होंने मांग की कि न्यूनतम मजदूरी को तत्काल बढ़ाकर ₹26,000 से ₹30,000 प्रति माह किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका प्रथा आज मजदूरों के शोषण का सबसे बड़ा हथियार बन गई है, जिसे जड़ से खत्म करना अनिवार्य है।

नए लेबर कोड को रद्द करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि ये कानून मजदूरों को उनके बुनियादी संवैधानिक हक से वंचित करते हैं। उन्होंने दुख जताया कि जब मजदूर अपने जीने लायक वेतन के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें लाठियां, जेल और देशविरोधी जैसे तमगे मिलते हैं, जो लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के शुरुआती दौर में पंडित नेहरू के नेतृत्व में श्रम कानूनों को एक कल्याणकारी संस्थागत आधार दिया गया था, ताकि श्रमिकों का जीवन सुरक्षित हो सके। गणतंत्र के 76 वर्षों के बाद आज परिस्थितियां पूरी तरह उलट चुकी हैं। आज का विकास मजदूरों के पसीने और उनके शोषण की बुनियाद पर खड़ा है। जब तक मजदूर सुरक्षित और सम्मानित नहीं होगा, देश की प्रगति केवल एक छलावा है। प्रदर्शन के अंत में रेणुकूट की सड़कों पर मजदूरों के साथ हाथ मिलाकर डब्लू सिंह ने यह संकल्प लिया कि जब तक सरकार इन दमनकारी नीतियों को वापस नहीं लेती और मजदूरों को एक सम्मानजनक कामकाजी माहौल नहीं मिलता, यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल वेतन की लड़ाई नहीं, बल्कि मजदूरों के अस्तित्व और स्वाभिमान की लड़ाई है।

पढ़ते रहिए युवा तुर्क: योगी कैबिनेट विस्तार: 8 ने ली शपथ, दो का हुआ प्रमोशन

डॉ अनिल गंगवार
डॉ अनिल गंगवार, गैस्ट्रोलॉजिस्ट, लखनऊ

Related posts

जातीय जनगणना में ओबीसी का हो स्पष्ट उल्लेख  

Baliram Singh

एसआईआर- 6 जनवरी के बाद 70,69,810 जमा हुए फॉर्म 6

Baliram Singh

महादेवा जाने की खुशी मातम में बदली, सड़क हादसे में दो युवकों की मौत  

Baliram Singh