सेवानिवृत्त शिक्षकों को दी गई भावभीनी विदाई, शिक्षा को बताया राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत
युवा तुर्क, बलिया
दुबहर के बीआरसी सभागार में शनिवार को ऐसा भावुक और प्रेरणादायी माहौल देखने को मिला, जहां वर्षों तक बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षकों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ की दुबहर इकाई द्वारा आयोजित “सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह” में शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने गुरुजनों के योगदान को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि संस्कार और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक पूरी निष्ठा और ईमानदारी से बच्चों के भविष्य को संवारने में जीवन लगा देता है, उसका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
समारोह में 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए शिक्षक विद्यासागर गुप्ता एवं कमरुनिशा सहित अन्य शिक्षकों को अंगवस्त्र, माल्यार्पण और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित शिक्षकों और अतिथियों ने उनके स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना की।
कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग देते हुए कंपोजिट विद्यालय सनाथ पांडेय के छपरा के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। समारोह की अध्यक्षता दिलीप राय ने की जबकि संचालन आशुतोष सिंह ने किया।
इस दौरान शिक्षक नेताओं गणेश जी सिंह, अजीत पांडेय, समरजीत बहादुर सिंह एवं अमरेश सिंह ने भी शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता पर शिक्षक का सम्मान:
बलिया के उच्च प्राथमिक विद्यालय सुजानीपुर में आयोजित एक अन्य सम्मान समारोह में सहायक अध्यापक सुनील कुमार पांडेय को राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में सम्मानित किए गए सुनील पांडेय का उनके विद्यालय पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।
समाजसेवी अक्षय सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अरुण सिंह समेत अन्य गणमान्य लोगों ने माल्यार्पण कर अंगवस्त्र भेंट किया। वक्ताओं ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की उपलब्धियां यह साबित कर रही हैं कि सरकारी स्कूलों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत केवल समर्पित शिक्षकों की है।
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