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नगर निकाय: मात्र 21 बाबू देखते हैं 6686 कर्मचारियों का बहीखाता  

निदेशालय

वर्कलोड के दबाव से खराब हो रही है निकाय निदेशालय के बाबुओं की सेहत

युवा तुर्क, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के लगभग 734 नगर निकायों में रहने वाले लगभग 5 करोड़ से ज्यादा प्रदेशवासियों की कैसे सुधरेगी सेहत, जब इन निकायों में कार्यरत 6686 केंद्रीयित कर्मचारियों का बहीखाता देखने वाले कर्मचारी ही तनाव में रहेंगे?

पूरे प्रदेश के 734 निकायों में उत्तर प्रदेश पालिका (केंद्रीयित) कर्मचारी के तहत कार्यरत अधिशासी अधिकारी, इंजीनियर, टैक्स इंस्पेक्टर सहित 6686 अधिकारियों व कर्मचारियों का बहीखाता केवल 21 कर्मचारियों के भरोसे है। इन 21 कर्मचारियों में से 13 प्रधान सहायक, 5 कनिष्ठ सहायक एवं 3 प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। ये कर्मचारी प्रदेश के 734 से ज्यादा निकायों में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति, एसीपी, पदोन्नति, विभागीय कार्यवाही सहित समस्त कार्य करते हैं। लेकिन स्टाफ के अभाव में इन कर्मचारियों पर कई गुना ज्यादा कार्य का प्रेशर रहता है।

निदेशालय
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय निदेशालय मिनिस्टीरियल सेवा संघ के पदाधिकारी

इन कर्मचारियों का भी करना पड़ता है कार्य:

नगर निकाय निदेशालय में कार्यरत इन 21 कर्मचारियों को केंद्रीयित कर्मचारियों के अलावा प्रदेश के 734 नगर निकायों में कार्यरत लगभग दो लाख से ज्यादा अकेंद्रियित कर्मचारियों से संबंधित मामलों को भी देखना पड़ता है।

इन दबावों को झेल रहे हैं ये 21 कर्मचारी:

काम का दबाव:

स्टाफ कम होने से इन कर्मचारियों पर काम दबाव कई गुना ज्यादा रहता है। एक – एक कर्मचारी को 2-3 पटल देखना पड़ता है।

हालात ऐसे में हैं कि इन कर्मचारियों को मेडिकल लीव भी नहीं मिल पाता है। यदि कोई कर्मचारी आकस्मिक लीव ले लिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटकी रहती है। लगभग आधा दर्जन कर्मचारी ऐसे हैं, जिनका लीव सैंक्शन न होने से पिछले साल भर से वेतन बाधित है।

खास बात यह है कि पूरे प्रदेश में ट्रांसफर-पोस्टिंग होती है, लेकिन यहां पर कई कर्मचारी ऐसे हैं, जिनका 3 साल बाद भी ट्रांसफर नहीं हो रहा है।

उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय निदेशालय मिनिस्टीरियल सेवा संघ के अध्यक्ष मनोज सिंह का कहना है कि स्टाफ काफी कम होने की वजह से निदेशालय के कर्मचारियों पर काम का दबाव बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से कर्मचारी तनाव में रहते हैं। इसका प्रतिकूल असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।

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डॉ अनिल गंगवार
डॉ अनिल गंगवार, गैस्ट्रोलॉजिस्ट, लखनऊ

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