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रजिस्टर्ड नहीं है प्रोजेक्ट, तब भी शिकायत कर सकेंगे खरीदार

UP RERA

यूपी-रेरा ने नियमों में किए 12 संशोधन, सबको जोड़कर जारी किए सामान्य नियम

घर खरीदारों के पैसे, प्रोजेक्ट के बैंक खाते, एजेंटों और विज्ञापनों को लेकर नियम हुए और स्पष्ट

बलिराम सिंह, लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर

UP-RERA ने उन लोगों के लिए भी बड़ी राहत दी है, जिन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट में घर खरीदा है जो प्राधिकरण में रजिस्टर्ड नहीं है। अब ऐसे खरीदार भी UP-RERA की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत कर सकेंगे। उन्हें भी अन्य रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदारों की तरह राहत मांगने का अधिकार होगा। शिकायत के साथ प्रोजेक्ट और बिल्डर की कुछ अतिरिक्त जानकारी देनी होगी।

UP RERA
संजय भूस रेड्‌डी, उत्तर प्रदेश रेरा चेयरमैन

इसके अलावा उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP-RERA) ने रियल एस्टेट से जुड़े सामान्य नियमों को अब एक जगह समेटकर जारी कर दिया है। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 को सभी संशोधनों के साथ दोबारा प्रकाशित किया है। इसमें 13 जुलाई 2026 तक किए गए 12 संशोधनों को शामिल किया गया है।

इन नियमों का सीधा असर बिल्डर्स, घर खरीदने वालों और रियल एस्टेट एजेंट्स पर पड़ेगा। खास तौर पर घर खरीदारों से लिए जाने वाले पैसे के इस्तेमाल, प्रोजेक्ट के बैंक खातों, कब्जा देने, प्लॉट या फ्लैट का हस्तांतरण, एजेंटों के काम और प्रोजेक्ट के विज्ञापन को लेकर कई नियम स्पष्ट किए गए हैं।

बिल्डर को बताना होगा कि प्रोजेक्ट में कौन-कौन जिम्मेदार है:

अब प्रमोटर यानी बिल्डर को प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी।

इसके साथ ग्राहक से संपर्क के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर और एक संपर्क या टोल-फ्री नंबर भी देना होगा। प्रोजेक्ट की हर तीन महीने की प्रगति रिपोर्ट यानी QPR भी संबंधित विशेषज्ञों के प्रमाणपत्र के साथ जमा करनी होगी।

बिल्डर की प्रोफाइल हमेशा अपडेट रहनी होगी:

हर बिल्डर को UP-RERA की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनानी होगी। जब वह किसी नए प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन कराएगा या उसकी कंपनी की जानकारी में बदलाव होगा, तो प्रोफाइल भी अपडेट करनी होगी। इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदार या ट्रस्टी, वित्तीय जानकारी और आयकर रिटर्न जैसी जरूरी जानकारियां अपडेट रखनी होंगी।

शिकायत और संपर्क के लिए अलग ई-मेल:

बिल्डर को चार अलग-अलग ई-मेल पते देने होंगे। इनमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, दूसरे प्रशासनिक काम, ग्राहक शिकायतों और आवंटियों व रियल एस्टेट एजेंट्स से संपर्क के लिए अलग ई-मेल होंगे।

इससे लोगों की शिकायत या जरूरी जानकारी गलत जगह जाने या छूट जाने की संभावना कम होगी।

प्रोजेक्ट का नाम वही होगा जो स्वीकृत नक्शे में है:

बिल्डर को प्रोजेक्ट का वही नाम इस्तेमाल करना होगा जो स्वीकृत नक्शे में दर्ज है। इससे खरीदार आसानी से समझ सकेंगे कि जिस प्रोजेक्ट की बुकिंग या बिक्री की जा रही है, वह वास्तव में उसी स्वीकृत प्रोजेक्ट से जुड़ा है।

कब्जा देने के लिए तय प्रारूप:

बिल्डर जब किसी खरीदार को फ्लैट या मकान का कब्जा देगा, तो उसे UP-RERA के तय प्रारूप में Offer of Possession देना होगा। इससे कब्जे के समय पैसे और अन्य हिसाब-किताब को लेकर होने वाली गड़बड़ी कम करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट जमा करने में देरी पर फीस:

बिल्डर या एजेंट अगर जरूरी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें तय शुल्क देना होगा। QPR जमा करने में देरी पर ₹15,000, सालाना ऑडिट रिपोर्ट देर से जमा करने पर ₹25,000 और रियल एस्टेट एजेंट की तिमाही रिपोर्ट देर से जमा करने पर ₹10,000 लेट फीस तय की गई है।

परिवार में फ्लैट ट्रांसफर पर सिर्फ ₹1,000 शुल्क:

किसी आवंटी की मृत्यु के बाद फ्लैट या प्लॉट परिवार के सदस्य के नाम जाता है तो ट्रांसफर के लिए ₹1,000 शुल्क लगेगा।

वहीं परिवार से बाहर के व्यक्ति के नाम आवंटन ट्रांसफर होने की स्थिति में यह शुल्क अधिकतम ₹25,000 होगा। इस व्यवस्था से खरीदारों से मनमाना ट्रांसफर शुल्क लेने की गुंजाइश कम होगी।

बलिया बलिदान दिवस
बलिया बलिदान दिवस

बिल्डर को प्रोजेक्ट के लिए तीन बैंक खाते रखने होंगे:

प्रोजेक्ट के लिए बिल्डर को अब तीन अलग-अलग बैंक खाते रखने होंगे—कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट।

खरीदारों से कलेक्शन अकाउंट में जमा होने वाली राशि का 70 प्रतिशत रोज सेपरेट अकाउंट और 30 प्रतिशत ट्रांजेक्शन अकाउंट में जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े लोन की राशि सेपरेट अकाउंट में जाएगी। इस खाते से पैसा निकालने और खर्च करने के लिए भी तय नियमों का पालन करना होगा। इन खातों का हर वित्तीय वर्ष में ऑडिट होगा और उसकी रिपोर्ट UP-RERA की वेबसाइट पर डालनी होगी। बिल्डर खरीदारों से प्रोजेक्ट की राशि नकद में नहीं ले सकेगा।

ओम प्रकाश केशरी
ओम प्रकाश केशरी, अध्यक्ष, अहरौरा नगर पालिका परिषद, मीरजापुर

बिल्डर के विज्ञापन में अब छिपी नहीं रहेगी जरूरी जानकारी:

अब प्रोजेक्ट के विज्ञापन और ब्रोशर में सिर्फ आकर्षक दावे करना पर्याप्त नहीं होगा।

बिल्डर और एजेंट को विज्ञापन में UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, UP-RERA वेबसाइट, QR कोड, प्रोजेक्ट के कलेक्शन अकाउंट की जानकारी, प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख और एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रमुखता से देना होगा।

इससे घर खरीदने वाले लोग विज्ञापन देखकर ही प्रोजेक्ट की जरूरी जानकारी जांच सकेंगे।

प्रशांत कुमार मंटू, व्यापारी नेता
प्रशांत कुमार मंटू, व्यापारी नेता

रियल एस्टेट एजेंटों के लिए ट्रेनिंग जरूरी:

रियल एस्टेट एजेंटों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जरूरी कर दिया गया है। एजेंटों को अपने रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज भी व्यवस्थित रखने होंगे। इसके अलावा उन्हें हर तीन महीने में अपने लेन-देन की रिपोर्ट UP-RERA की वेबसाइट पर जमा करनी होगी।

 IFMS के पैसे का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं होगा:

IFMS यानी रखरखाव के लिए खरीदारों से जमा कराई जाने वाली राशि को लेकर भी नियम साफ किए गए हैं। यह रकम प्रोजेक्ट के आकार और रखरखाव की जरूरत के हिसाब से तय होगी। बिल्डर को यह पैसा एक अलग बैंक खाते में रखना होगा।

जब कॉमन एरिया की जिम्मेदारी रेजिडेंट्स की एसोसिएशन को दी जाएगी, तो पूरी IFMS राशि भी एसोसिएशन को सौंपनी होगी।

इस पैसे का इस्तेमाल केवल कॉमन एरिया और वहां की सुविधाओं के रखरखाव, मरम्मत और जरूरी बदलाव के लिए किया जा सकेगा। एसोसिएशन को इस पैसे का पूरा हिसाब रखना होगा और उसका ऑडिट भी कराना होगा।

संदीप पांडेय
संदीप पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष, फेडरेशन आफ मिनिस्ट्रियल सर्विस एसोसिएशन

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प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने और दूसरी कंपनी को सौंपने के नियम स्पष्ट:

नए नियमों में यह भी साफ किया गया है कि किसी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन किन परिस्थितियों में बढ़ाया जा सकता है, कब रजिस्ट्रेशन वापस लिया जा सकता है और किन परिस्थितियों में प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किसी दूसरे प्रमोटर को दी जा सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी प्रोजेक्ट के संकट में फंसने पर खरीदारों के हित सुरक्षित रहें और संभव होने पर रुके हुए प्रोजेक्ट को दोबारा आगे बढ़ाया जा सके।

नवजीवन इंग्लिश स्कूल

वेबसाइट पर उपलब्ध हैं सभी नियम:

UP-RERA ने बताया कि सभी संशोधनों को मिलाकर तैयार किए गए सामान्य विनियम प्राधिकरण की वेबसाइट के Legal Section में उपलब्ध हैं। इन्हें प्रमुख प्रकाशकों को भी भेजा जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इन नियमों को आसानी से देख और समझ सकें। नए समेकित नियमों से बिल्डर, खरीदार और रियल एस्टेट एजेंट्स के लिए यह समझना आसान होगा कि उन्हें क्या करना है और किस स्थिति में कौन-सा नियम लागू होगा।

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Dr Anil Gangwar
डॉ अनिल गंगवार, गस्ट्रोलॉजिस्ट

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