गठबंधन के तहत बलिया की कौन-कौन सीटें कांग्रेस के हिस्से में जाएंगी?
बलिराम सिंह, बलिया/लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की घड़ियां धीरे-धीरे नजदीक आ रही हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की चर्चा भी तेज हो रही है। गठबंधन को धार देने के लिए अब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी शांत हो गए हैं और मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तारीफ कर रहे हैं।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी 120 सीटों की डिमांड कर रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की दलील है कि 2017 में हमने गठबंधन के तहत 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बेहतर रिजल्ट दिया। ऐसे में कम से कम 120 सीटें मिलनी चाहिए।
यदि गठबंधन में कांग्रेस की सीटों की हिस्सेदारी बढ़ती है, तो प्रदेश के विभिन्न जनपदों में समाजवादी पार्टी के खेमे में बेचैनी बढ़ना लाजमी है। सपा कार्यकर्ता इस मंथन में हैं कि आखिर जिले की कौन सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी। कुछ इसी तरह की चर्चा पूर्वांचल के बलिया Ballia जनपद में भी हो रही है।

अब सवाल है कि बलिया की सात सीटों में से कौन सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी? फिलहाल बलिया की तीन सीटें फेफना, सिकंदरपुर और बैरिया में सपा का कब्जा है।
इसके अलावा बांसडीह में भाजपा, बलिया सदर भाजपा, बेल्थरा रोड से ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा का विधायक है। इसके अलावा रसड़ा सीट से बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह निर्वाचित हुए थे, जिनका पिछले दिनों बीमारी की वजह से निधन हो गया और अब रसड़ा सीट रिक्त हो गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस जनपद की तीन से चार सीटों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है। इनमें बलिया, बांसडीह, सिंकदरपुर और बेल्थरा रोड शामिल हैं। सीट बंटवारे के दौरान कांग्रेस इन्हीं सीटों पर अपना दावा कर सकती है।

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बलिया सदर सीट पर 18 हजार, सिकंदरपुर में 26 हजार और बांसडीह में लगभग 21 हजार वोट मिले थे।
लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार कांग्रेस बेल्थरा रोड सुरक्षित सीट पर भी दावा कर रही है। ऐसे में इन सीटों पर सपा के कार्यकर्ताओं में बेचैनी होना स्वाभाविक है।
अब देखना है कि इन चार में से कितनी सीटें कांग्रेस के खाते में जाती है?

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हालांकि प्रदेश स्तर पर देखे तो यदि हर जिले से कांग्रेस को एक से दो सीटें मिल जाए तो कांग्रेस की मांग पूरी हो जाएगी। आशा है कि जिन जिलों में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली और जहां पर कांग्रेस ने मजबूती से चुनाव लड़ा, उन जिलों में कांग्रेस दो से ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। इनमें अमेठी, रायबरेली, इलाहाबाद, सीतापुर, सहारनपुर और बाराबंकी से कांग्रेस से सांसद चुनाव जीते। इनके अलावा महाराजगंज, बांसगांव, वाराणसी में कांग्रेस ने मजबूती से चुनाव लड़ा था।
हालांकि अभी यह देखना है कि चुनाव में समाजवादी पार्टी कितनी सीटें कांग्रेस को देती है? इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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