राजस्व विभाग में हलचल, लेखपाल निलंबित
युवा तुर्क, बलिया
सरकारी तंत्र में करप्शन का दीमक इस कदर फैल गया है कि अब जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लेखपाल 50 हजार रुपए घूस मांग रहा है। जी हां, बलिया जनपद में जाति प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर 50 हजार रुपये मांगने की शिकायत ने सदर तहसील के राजस्व विभाग में हलचल मचा दी है। सुल्तानपुर गांव के क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह पर तुरैहा जाति का प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए प्रति आवेदन 50 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने कथित बातचीत की दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी अधिकारियों को सौंपी। जिलाधिकारी के निर्देश पर लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। मामले में विभागीय जांच शुरू करा दी गई है।
सुल्तानपुर निवासी सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा ने शिकायत में आरोप लगाया कि जाति प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए लेखपाल समेत अन्य राजस्व कर्मियों की ओर से 50 हजार रुपये की मांग की गई।
शिकायत के साथ 8 अप्रैल और 17 सितंबर 2026 की बताई जा रही दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के रूप में दी गईं।
पहले आवेदन निरस्त हो चुके थे
तहसीलदार सदर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने पहले भी जाति प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था।
आवश्यक साक्ष्य और अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमानुसार पोर्टल पर आख्या दर्ज कर आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। इसके बाद शिकायतकर्ता ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए शिकायत की।
ऑडियो में 50 हजार रुपये की मांग का दावा
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग के प्राथमिक परीक्षण में बातचीत करने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी।
हालांकि, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि रिकॉर्डिंग में सुनाई दे रही आवाज क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह की है। रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रति आवेदन 50 हजार रुपये मांगने और रकम का एक हिस्सा अधिकारियों तक पहुंचाने की बातचीत होने का उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।
निष्पक्ष जांच के लिए निलंबन की संस्तुति
तहसीलदार ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए संबंधित लेखपाल को निलंबित करने तथा विभागीय जांच कराने की संस्तुति की। जिलाधिकारी के आदेश के बाद संदीप सिंह को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन अवधि में उन्हें तहसील बलिया के भूलेख कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
निलंबन आदेश के मुताबिक संदीप सिंह सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। अब विभागीय जांच में ऑडियो रिकॉर्डिंग, शिकायत में लगाए गए आरोप और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
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