राज्यसभा चुनाव में सपा प्रमुख ने कॉरपोरेट व परिवार को दी प्राथमिकता
बलिराम सिंह, लखनऊ
समाजवाद की बात करते-करते समाजवादी पार्टी पूंजीवाद की राह पर चल पड़ी है। साथ ही, सपा अभी भी परिवारवाद के भंवरजाल से बाहर नहीं निकल पा रही है। मजे की बात यह है कि जिस अडानी-अंबानी के खिलाफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अभियान चला रहे हैं। उसी अंबानी से राहुल गांधी के सहयोगी अखिलेश यादव नजदीकी बढ़ा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए सपा ने बुधवार को एक बड़ा और अप्रत्याशित सियासी दांव खेलते हुए कॉर्पोरेट जगत के जाने-माने चेहरे और रिलायंस समूह से जुड़े धनराज नाथवानी को अपना उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक गलियारों में सबको चौंका दिया है।
उनके अलावा अखिलेश यादव ने अपने चाचा एवं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव पर पुनः विश्वास जताते हुए उन्हें एक बार फिर राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दोनों प्रत्याशियों ने बुधवार को लखनऊ स्थित विधानभवन में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

सपा के धनराज नाथवानी को संसद भेजने के इस फैसले को लेकर भाजपा के सहयोगी दल उनपर हमलावर हैं। सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यही है अखिलेश यादव का पीडीए?
नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथपत्र के अनुसार, धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) में प्रोफेशनल कंसल्टेंट हैं और कई गैर सूचीबद्ध कंपनियों के निदेशक हैं। वे मुंबई में अंधेरी वेस्ट के रहने वाले हैं।
वे राज्यसभा सांसद और रिलायंस समूह के कॉर्पोरेट अफेयर्स निदेशक परिमल नाथवानी के पुत्र हैं।
परिमल नाथवानी को देश के शीर्ष उद्योगपति अंबानी परिवार का बेहद नजदीकी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। यहां बता दें कि परिमल नाथवानी वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं। वे एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जून 2026 में चुनाव जीते थे और चौथी बार राज्यसभा में पहुंचे।
धनराज नाथवानी (40 वर्षीय) ने लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से स्नातक की पढ़ाई की है। वे कॉरपोरेट लॉ और पब्लिक रिलेशन मैनेजमेंट में एमबीए हैं। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।
नाथवानी के अलावा सपा के थिंक टैंक कहे जाने वाले वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव को दोबारा राज्यसभा भेजकर पार्टी ने अपने परंपरागत कैडर और संगठन को एकजुट रखने का स्पष्ट संदेश दिया है। प्रो. रामगोपाल लंबे समय से संसद के उच्च सदन में पार्टी की आवाज बने रहे हैं और संसदीय प्रक्रियाओं व रणनीतिक मामलों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रो. रामगोपाल यादव के लंबे राजनीतिक अनुभव और धनराज परिमल नथवानी के कॉर्पोरेट प्रभाव का यह संयोजन सपा को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में नया संतुलन साधने में मदद करेगा।
प्रो. रामगोपाल यादव छठी बार राज्यसभा के लिए चुने जाएंगे। इससे पहले वे 5 बार (1992-1998, 1998-2004, 2008-2014, 2014-2020 और 2020-2026) राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा वर्ष 2004 में संभल से लोकसभा सांसद भी चुने गए।
शपथपत्र के अनुसार, सपा उम्मीदवार धनराज नाथवानी 373.26 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। इसमें पति-पत्नी व बच्चों की कुल चल संपत्ति 291.99 करोड़ रुपये है। कुल देनदारी (कर्ज) 3.19 करोड़ रुपये है।
वरिष्ठ पत्रकार अनिल अत्रि सोशल मीडिया पर लिखते हैं,
“समाजवाद से पूंजीवाद की ओर,,,
सुना है पूंजीवाद ने समाजवादी पार्टी को ‘नथिया’ लिया है।
एक जेब में परिवारवाद, दूसरी में पूंजीवाद और नारे में समाजवाद, सत्ता तक गरीबों की आवाज अब पूंजीवादियायें के मुख से होकर ही पहुंचेगी।”
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