मंगल पांडेय विचार मंच ने अति बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षकों को घर जाकर किया सम्मानित, लिया आशीर्वाद
युवा तुर्क, बलिया
शिक्षक दिवस पर जब वर्षों पहले पढ़ाए हुए शिष्य अपने बुजुर्ग गुरुजनों के दरवाजे पर पहुंचे तो पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं। किसी ने गुरु के चरण स्पर्श किए तो किसी ने माल्यार्पण कर सम्मान जताया। लंबे अंतराल के बाद शिष्यों को अपने सामने देखकर बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षक भावुक हो उठे। मौका था मंगल पांडेय विचार मंच की ओर से शिक्षक दिवस पर शुरू की गई अनूठी पहल का।

मंच के सदस्यों ने इस बार किसी सभागार में कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय क्षेत्र के अति बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षकों के घर पहुंचकर उनका कुशल-क्षेम जाना और उन्हें सम्मानित किया। गुरुजनों को माल्यार्पण करने के साथ स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद सदस्यों ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।

मंगल पांडेय विचार मंच के सदस्यों ने अपने गुरुजन गोपालजी शर्मा, कमला शंकर ओझा, अवध बिहारी चौबे, श्रीकांत चौबे एवं लाल बच्चन ठाकुर के आवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया। शिष्यों को अचानक अपने घर देखकर गुरुजनों के चेहरे पर खुशी साफ झलक उठी। उन्होंने पुराने संस्मरण साझा किए और अपने शिष्यों को दिल खोलकर आशीर्वाद दिया।
सामाजिक चिंतक बब्बन विद्यार्थी ने कहा कि गुरु-शिष्य का रिश्ता केवल विद्यालय और पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर कायम रहने वाला संबंध है। गुरु द्वारा दिए गए संस्कार और दिखाई गई राह जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन करती है। ऐसे में बुजुर्ग शिक्षकों का सम्मान करना और समय-समय पर उनका हाल-चाल लेना समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण की नींव रखते हैं। आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर चुके लोगों के पीछे उनके गुरुजनों की मेहनत, शिक्षा और संस्कार का महत्वपूर्ण योगदान है।
इस अवसर पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिनेश पाठक, रणजीत सिंह, अरुणेश पाठक, शंकर प्रसाद चौरसिया, रामजी गिरी, मुमताज शाह सहित विचार मंच के कई गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। सभी ने समाज के लोगों से अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्मीयता का भाव बनाए रखने की अपील की।


