देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं- गिरीश चंद्र यादव
युवा तुर्क, मऊ
मऊ जनपद के प्रभारी मंत्री गिरीश चन्द्र यादव ने कहा है कि महिलाओं को निर्णय-निर्माण में समान हिस्सेदारी देना अब टलने वाला मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवश्यकता बन चुका है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि संसद में हाल में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों और अन्य संवैधानिक प्रस्तावों पर हुई चर्चा ने राजनीतिक दलों की वास्तविक सोच को उजागर कर दिया है। उनका आरोप था कि जब भी महिलाओं को सत्ता और नीति-निर्माण में बराबरी देने की बात आती है, तब विपक्षी दल असहज हो जाते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह समय राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर देशहित में निर्णय लेने का है। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को उनका अधिकार देना किसी दल का उपकार नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक दायित्व है।“
मंत्री ने यह भी कहा कि भले ही कुछ दलों ने दबाव में आकर महिला आरक्षण का समर्थन किया हो, लेकिन वास्तविक प्रतिबद्धता उनके आचरण में नहीं दिखी। उन्होंने इसे “महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर दोहरा रवैया” बताया।
उन्होंने पंचायत स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उदाहरण देते हुए कहा कि अब महिलाएं केवल स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि संसद और विधानसभाओं में भी निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा तय करने वाली शक्ति बन चुकी हैं।”
16 और 17 अप्रैल को संसद में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए प्रभारी मंत्री ने विपक्ष के व्यवहार को “अलोकतांत्रिक” और “निराशाजनक” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल विधेयकों का विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण के एजेंडे पर प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
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