एटक के लोग मजदूर आंदोलन में अराजकता की बजाय अनुशासित प्रतिरोध में यकीन करते हैं- बेचू गिरी
बेचू गिरी, फरीदाबाद
पहले पानीपत रिफायनरी फिर गुरुग्राम मानेसर अब पलवल, फरीदाबाद और नोएडा यानी ठेके पर काम करने वाले मजदूरों का स्वत: स्फूर्त आंदोलन अपने साथ हो रहे शोषण के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।
हम एटक के लोग मजदूर आंदोलन में अराजकता, तोड़फोड़ की बजाय संगठित और अनुशासित प्रतिरोध में यकीन करते हैं और हमने बहुत सारी जगह पर विजय भी हासिल की है। प्रशासन बहुत सारे हथकंडे इस्तेमाल कर आंदोलन को समझने और न्याय करने की बजाय दबाने में लगा हुआ है।
एक तरफ हरियाणा सरकार ने 15,220 रू प्रति माह न्यूनतम वेतन घोषित किया है जो कि पहली अप्रैल 2026 से लागू होगा। वहीं दूसरी तरफ यह कैसी विडंबना है कि माहौल को शांत करने की बजाय फरीदाबाद के उद्योगपति खुलकर इस न्यूनतम वेतन का भी विरोध कर रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि वे किसी न किसी प्रकार से इसको लागू नहीं करेंगे।
क्या यह सच्चाई नहीं है की उद्योगों में अगर 100 पक्के मजदूर हैं तो 1000 ठेकेदार के मजदूर हैं इनसे 12 घंटा काम कराने के बाद न्यूनतम वेतन से थोड़ा सा ऊपर दे दिया जाता है। कोई भी अन्य कानूनी सुविधा नहीं दी जाती है।
मजदूरों का निर्मम शोषण सिर्फ निजी क्षेत्र में ही नहीं है बल्कि सरकारी संस्थानों में भी यही स्थिति है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल फरीदाबाद में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को तीन राष्ट्रीय छुट्टियों के अलावा कोई त्यौहारी छुट्टी नहीं दी जाती है। कोई कैजुअल लीव, सिक लीव या कोई अर्जित अवकाश नहीं है।
कहने का मतलब कि उद्योगों में ठेकेदारी प्रथा सामंती समाज की तरह गुलामी का स्वरूप धारण करती जा रही है। यह औधोगिक अभिशाप बनती जा रही है। क्या मालिक और सरकार अपने अंदर झांकेंगे?
मजदूर साथियों आप कोई भी झंडा उठाओ, मगर आपकी विजय आपके संगठित और अनुशासित आंदोलन में है, अराजकता तोड़फोड़ और आगजनी में नहीं।

(लेखक हरियाणा प्रदेश एटक के अध्यक्ष हैं।)
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