संसद से लेकर सड़क तक दलितों और शोषितों की आवाज रहे जननायक चंद्रशेखर- राम गोविंद चौधरी
राम गोविंद चौधरी, बलिया
भारतीय राजनीति में डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण (जेपी), जननायक चंद्रशेखर जी और ‘धरतीपुत्र’ मुलायम सिंह यादव जी वे नक्षत्र हैं, जिन्होंने न केवल सत्ता की परिभाषा बदली, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति को राजनीति के केंद्र में खड़ा किया। इन महापुरुषों एवं नेताओं का योगदान केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्होंने भारतीय लोकतंत्र को “समाजवाद” की एक ऐसी धारा दी, जो आज भी प्रासंगिक है।
- डॉ. राम मनोहर लोहिया: समाजवाद के प्रखर विचारक

डॉ. लोहिया भारतीय समाजवाद के बौद्धिक जनक थे। उन्होंने नारा दिया था—
“संसोपा ने बांधी गांठ, पिछड़े पावें सौ में साठ”।
उन्होंने जाति प्रथा के विनाश और भाषाई गुलामी के खिलाफ जो बिगुल फूँका, उसने देश की राजनीति की दिशा ही बदल दी। लोहिया का ‘सप्त क्रांति’ का विचार समाज के सर्वांगीण विकास का खाका था। वे मानते थे कि जब तक राजनीति में दलित, पिछड़ों और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र अधूरा है।
2.जयप्रकाश नारायण: लोकशक्ति के उद्घोषक:

‘जेपी’ या लोकनायक के नाम से विख्यात जयप्रकाश नारायण जी ने भारतीय राजनीति को ‘नैतिकता’ और ‘संपूर्ण क्रांति’ का पाठ पढ़ाया। जब 1970 के दशक में देश के लोकतंत्र पर खतरा मंडराया, तब जेपी ने छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर सत्ता को चुनौती दी। जिसमें हमको भी सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
उन्होंने राजनीति को सत्ता के गलियारों से निकालकर लोकशक्ति (Public Power) के पास पहुँचाया। वे पद और स्वार्थ से परे एक ऐसे तपस्वी थे, जिन्होंने बिना प्रधानमंत्री बने भारतीय इतिहास की धारा बदल दी।
- जननायक चंद्रशेखर: वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रतीक:
चंद्रशेखर जी ने भारतीय राजनीति में एक ‘बागी’ तेवर और वैचारिक स्पष्टता को जीवित रखा। ‘यंग तुर्क’ के नाम से मशहूर चंद्रशेखर जी ने अपनी ऐतिहासिक पदयात्रा के माध्यम से भारत की जमीनी हकीकत को समझा। उन्होंने कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। बलिया की माटी से उपजे इस जननायक ने संसद से लेकर सड़क तक हमेशा दलितों और शोषितों की आवाज को पूरी प्रखरता के साथ बुलंद किया ऐसे महान नेता के साथ हम भी काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
- मुलायम सिंह यादव जी: जमीन से जुड़ा संघर्ष:

लोहिया और जेपी के विचारों को जमीन पर उतारने का श्रेय ‘धरतीपुत्र’ मुलायम सिंह यादव जी को जाता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश जैसी जटिल राजनीतिक भूमि पर समाजवाद का झंडा लहराया। “जिसका काम, उसी का दाम” के सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और किसानों को संगठित किया। एक अखाड़े के पहलवान से लेकर देश के रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के पद तक उनका सफर इस बात का प्रमाण था कि एक साधारण किसान का बेटा भी राजनीति की बुलंदियों को छू सकता है।
ऐसे महान नेता के साथ हम भी काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
एक युग और विचार का संगम:
इन चारों महान विभूतियों के बीच एक अटूट कड़ी थी-

“गरीब और वंचित के प्रति समर्पण”:
लोहिया ने विचार दिया।
जेपी ने उस विचार को क्रांति में बदला।
चंद्रशेखर ने उस विचार की मशाल को निडरता से थामा।
मुलायम सिंह यादव ने उस विचार को शासन और सत्ता के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।
आज जब हम भारतीय राजनीति के वर्तमान स्वरूप को देखते हैं, तो पाते हैं कि इन महापुरुषों द्वारा बोए गए ‘सामाजिक न्याय’ और ‘समानता’ के बीज ही आज के लोकतंत्र को मजबूती दे रहे हैं। ये महज नाम नहीं हैं, बल्कि ये एक निरंतर चलने वाला वह संघर्ष हैं, जो हर पीढ़ी को अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जन्मशताब्दी के संदर्भ में।
(लेखक पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेहद करीबी रहे। उत्तर प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।)
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