दिनभर भटकते रहे यात्री, मंत्री से नहीं मिला ठोस आश्वासन: कर्मचारी नेता
राजेश तिवारी, नई दिल्ली
सरकार की बेरुख़ी के चलते राजधानी में गुरुवार डीटीसी कर्मचारियों ने बसों का चक्का जाम कर दिया । हालांकि तीन दिन पुरानी बसों की इस हड़ताल को समाप्त करने को लेकर डीटीसी कर्मचारियों व अधिकारियों की परिवहन मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह के साथ बैठक हुई, लेकिन बैठक बेनतीजा रही। सरकार की इस बेरुख़ी के चलते डीटीसी कर्मचारियों ने हड़ताल को आगे बढ़ा दिया। जबकि शुरुआत में तीन दिन की हड़ताल घोषित की थी। ख़ासबात यह है कि गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन होने की वजह से पूरी सरकार समारोहों में व्यस्त रही और यात्री सड़क पर भटकते रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर राजधानी में पहले ही दर्जनों सरकारी कार्यक्रम घोषित होने की वजह से दिल्ली सरकार गुरुवार को सुबह से ही व्यस्त रही। तीन दिन पुरानी सरकारी बसों की हड़ताल को समाप्त कराने को लेकर कोई ख़ास पहल नहीं दिखी।
पता चला है कि परिवहन मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह ने डीटीसी मुख्यालय में अधिकारियों के साथ कर्मचारियों से बैठक की। कर्मचारियों ने बैठक में विस्तार से अपनी मांगें रखी, लेकिन मंत्री की तरह से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। कर्मचारियों की मानें, तो मंत्री का रुख़ बहुत सीरियस नहीं रहा, जैसे फ़िलहाल वह इस मामले को आश्वासन देकर टालना चाहते हैं। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि बैठक में शामिल टाटा कंपनी के अधिकारी अपने चालक और परिचालकों को फ़िलहाल कुछ देने के मूड में नहीं दिखे। जिसका नतीजा यह रहा कि बैठक बेनतीजा रही।
सड़क पर नहीं दिखीं बसें, यात्री रहे परेशान:
गुरुवार को सुबह से ही सड़क से बसें ग़ायब थीं। सूत्रों की मानें तो कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए पूरी रात तैयारी की थी, जिससे एक भी बस सड़क पर न उतरे।
बसें न होने की वजह से बड़ी संख्या में यात्री भटकते देखे गए। बसों की इस कमी का ऑटो चालकों ने पूरा फ़ायदा उठाया और यात्रियों से मनमाना किराया वसूला। लोग समय पर ऑफ़िस पहुंचने की आपाधापी में मजबूरन बेहिसाब किराया देकर किसी तरह ऑफ़िस पहुंचे।
मेट्रो कनेक्टिविटी वाली बसें भी ग़ायब:
डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल की सबसे बड़ी सफलता मेट्रो कनेक्टिविटी वाली बसों को बंद कराने से मिली। जानकारों की मानें, तो सुबह को मेट्रो कनेक्टिविटी वाली कुछ बसें चल रही थीं, लेकिन थोड़ी ही देर बाद ग़ायब हो गयीं। येलो कलर वाली बसों को भी नहीं चलने दिया गया। दोपहर बाद येलो कलर वाली बसों का पहिया भी रुक गया।
डिपो में लगा ताला, बाहर भंडारा:
दिल्ली परिवहन निगम के शत प्रतिशत डिपो के मुख्य दरवाज़ों पर ताला लटका देखा गया। हड़ताली कर्मचारी डिपो के बाहर बैठे देखे गए।
कर्मचारी नेताओं की ओर से लगातार घोषणा की जा रही थी कि कोई भी भाई डिपो से बाहर बस न निकाले। कालकाजी डिपो में एक भंडारा आयोजित किया गया। जहां डीटीसी के कर्मचारी भंडारा खाने पहुंचे और एकता दिखाते हुए घोषणा की कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
डीटीसी कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
डीटीसी चालक एवं परिचालक का वेतन 862 रूपए से बढ़ाकर 2,000 रुपए प्रतिदिन किया जाए। सामाजिक सुरक्षा के मद्देनजर 50 लाख रूपए का दुर्घटना बीमा, कैंसलेश मेडिकल सुविधा, हर छह महीने में महंगाई भत्ता बढ़ाना और हर पांच साल में मूल वेतन में बढ़ोतरी की जाए और सालाना बोनस दिया जाए। कर्मचारी नेता ललित चौधरी और मनोज शर्मा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2024 से वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
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