खनन कारोबार, फर्जी दस्तावेजों और वित्तीय हेराफेरी मामले में हुई गिरफ्तारी
युवा तुर्क, ओबरा/सोनभद्र
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में खनन कारोबार, फर्जी दस्तावेजों और वित्तीय हेराफेरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। ओबरा पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने कई दिनों की कड़ी घेराबंदी के बाद वांछित मुख्य आरोपी इश्तियाक खान को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। 10 सितंबर को पुलिस द्वारा आरोपी को सोनभद्र के जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से अदालत ने रिमांड स्वीकृत करते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार (जेल) भेज दिया।

पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी ओबरा प्रभात राय के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम को यह सफलता प्राप्त हुई है।
मुंबई के चूनाभट्टी से हुई गिरफ्तारी:
वांछित इश्तियाक खान की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं।
सर्विलांस और सटीक मुखबीर सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने मुंबई के थाना चूनाभट्टी क्षेत्रांतर्गत प्रियदर्शनी बस स्टॉप के पास घेराबंदी की। 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 3:15 बजे पुलिस टीम ने आरोपी की पहचान की तस्दीक करते हुए उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया।
ये है आरोप:
यह मामला सोनभद्र जनपद के ग्राम बिल्ली-मारकुंडी स्थित गिट्टी/बोल्डर (डोलोस्टोन) के 10 वर्षीय खनन पट्टे से जुड़ा हुआ है। वादी सुधीर कुमार श्रीवास्तव द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, उनकी पत्नी रिंकी श्रीवास्तव के नाम स्वीकृत खनन पट्टे की अभिलेखीय व विभागीय औपचारिकताओं की जिम्मेदारी इश्तियाक खान को दी गई थी।
आरोप है कि इश्तियाक खान ने पट्टाधारक के नाम से की जाने वाली विभागीय प्रक्रियाओं को कथित रूप से ‘मेसर्स राधिका इंडस्ट्रीज’ के नाम से संचालित कराया।
इस दौरान सरकारी विभागों और बैंकों में फर्जी हस्ताक्षर, कूटचरित शपथ पत्र, फर्जी आवेदन और कागजातों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही खनन पट्टे के हिसाब-किताब में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी और गबन का आरोप भी लगाया गया है।
10 सितंबर को कोर्ट परिसर में उपस्थित इश्तियाक खान के अधिवक्ता ने मीडिया के सामने आधिकारिक बयान देते हुए पुलिस की इस पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे। अधिवक्ता का दावा था कि यह मामला राधिका एंटरप्राइजेज फर्म के पार्टनरों के बीच का आपसी व्यापारिक विवाद है, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी प्रथम दृष्टया दीवानी (सिविल) मामला माना था। वकील ने आरोप लगाया था कि पुलिस बिना जीडी रवानगी के सादे कपड़ों में मुंबई पहुंची और कार्रवाई की।
लेकिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट और बीएनएस की संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमे ने यह साफ कर दिया है कि यह मामला केवल आपसी लेन-देन का न होकर सरकारी विभागों व बैंकों में फर्जी दस्तखत और कूटचरित दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा है।
मात्र 18 सालों में बढ़ा साम्राज्य:
वर्ष 2008-09 में बेहद साधारण स्तर से कदम रखने वाले इश्तियाक खान का प्रभाव दुद्धी के पूर्व विधायक व राज्यमंत्री स्वर्गीय विजय सिंह गोंड के संरक्षण में बढ़ा था।
इसके बाद समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं से नजदीकियों के बल पर खनन विभाग में रसूख कायम हुआ। वर्ष 2022 में तत्कालीन जिलाधिकारी टी.के. शिबू के साथ सांठगांठ के आरोपों में डीएम के निलंबन के बाद भी यह कारोबार फलता-फूलता रहा।

