सिंचाई विभाग में 344 फर्जी कर्मचारियों का ट्रेजरी में खाता खुलवा हुआ भुगतान
युवा तुर्क, मिर्जापुर
सिंचाई विभाग के मिर्जापुर कैनाल डिविजन के लघु डाल पम्प कैनाल खण्ड में वित्तीय वर्ष-2025-26 में एकाउंटेंट और उच्चाधिकारियों की मिली भगत से लगभग 16 करोड़ रुपये के एरियर भुगतान का घोटाला का मामला प्रकाश में आया है। एमसीडी के एकाउंटेंट ने लघु डाल पम्प कैनाल डिविजन के 344 कर्मचारियों का फर्जी खाता खुलवा कर एरियर की धनराशि का भुगतान कर दिया। महालेखाकार प्रयागराज की दस सदस्यीय टीम की वर्तमान वित्तीय वर्ष की आडिट में घोटाले का खुलासा हुआ तो एमसीडी के अधिशासी अभियंता एवं अन्य अफसरों के पैरों तले की जमीन खिसक गई। अधिशासी अभियंता ने आनन-फानन में विभाग के एकाउंटेंट व एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शहर कोतवाली में रपट दर्ज कराकर मामले की लीपापोती में जुट गए।
सिंचाई विभाग के मिर्जापुर कैनाल डिविजन के अधिशासी अभियंता को अन्य दस खण्ड के कर्मचारियों के एरियर भुगतान करने का डीडीओ पावर दिया गया है। इसी डिविजन के लिपिक और एकाउंटेंट कर्मचारियों को किए जाने वाले एरियर का बिल बना कर अधिशासी अभियंता से हस्ताक्षर कराने के बाद ट्रेजरी को भुगतान करने के लिए भेज देते हैं।
ट्रेजरी से कर्मचारियों के बैंक खाते में भुगतान कर दिया जाता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में एमसीडी के एकाउंटेंट जितेंद्र कुमार ने लघु डाल पम्प कैनाल के 344 फर्जी कर्मचारियों का ट्रेजरी में खाता खुलवा कर 16 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इन कर्मचारियों की विभाग में नियुक्ति भी नहीं हुई है।
जब इसकी जानकारी लघु डाल पम्प कैनाल डिविजन के अधिशासी अभियंता को हुई तो उन्होने आपत्ति जताई। एमसीडी के अधिशासी अभियंता ने एकाउंटेंट जितेंद्र कुमार के खिलाफ शहर कोतवाली में रपट दर्ज कराने के बाद निलंबित भी कर दिए। अभी अन्य किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या है एरियर घोटाला?
शासन से जब कर्मचारियों के वेतन में जिस महीने वृद्धि किया जाता है। यदि उस महीने के वेतन का भुगतान कर दिया गया है और कर्मचारी को वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिला है। तब वेतन में वृद्धि की गई धनराशि को अगले महीने के वेतन के साथ वृद्धि की गई धनराशि को जोड़ कर भुगतान किया जाता है। उसी धनराशि के भुगतान को एरियर के मद में भुगतान किया जाता है।
एरियर घोटाले का 18 अक्तूबर को हुआ खुलासा:
महाप्रबंधक लेखाकार प्रयागराज की आडिट टीम ने वर्तमान वित्तीय वर्ष की आडिट 14 अक्तूबर से शुरू की। आडिट टीम ने 16 अक्तूबर को आडिट में लगभग 16 करोड़ रुपये के फर्जी एरियर भुगतान का मामला पकड़ लिया।
इसके बाद एमसीडी में हड़कंप मच गया। एमएसीडी के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार ने 18 अक्तूबर को शहर कोतवाली में एकाउंटेंट जितेंद्र कुमार व एक अज्ञात के खिलाफ रपट दर्ज करा दिया।
लीपापोती करने में जुटे अफसर:
लघु डाल पम्प कैनाल के फर्जी कर्मचारियों को लगभग 16 करोड़ रुपये एरियर का फर्जी भुगतान किए जाने के मामले की लीपापोती में सिंचाई विभाग के अधिकारी जुट गए है। विभागीय सूत्रों की मानें तो घोटाले को दबाने के लिए शासकीय मद में इससे अधिक धनराशि भी जमा करा दी गई। जिससे मामले को दबाया जा सके, लेकिन आडिट टीम ने अपनी जांच में इस मामले को पकड़ लिया।
कोट
इस मामले की आडिट कराई जा रही है। आडिट में जो भी पकड़ा जाएगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। एकाउंटेंट व एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रपट दर्ज करा दिया गया है। यदि इस मामले में अन्य कर्मचारी भी शामिल होंगे तो उनके खिलाफ भी रपट दर्ज कराई जाएगी।
प्रमोद कुमार, अधिशासी अभियंता एमसीडी

