लाल किला ग्राऊंड में सवर्धम प्रार्थना सभा में जुटे धर्मगुरु
युवा तुर्क, नई दिल्ली
वर्तमान में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच विश्व शांति हेतु भारत के सभी धर्मों के प्रमुखों ने लाल किला ग्राउंड में सर्वधर्म प्राथर्ना सभा का आयोजन किया। वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ती अशांति, संघर्ष तथा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच आज विभिन्न धर्मों एवं समुदायों के लोगों ने एकत्रित होकर विश्व शांति, अहिंसा और प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संदेश दिया।

कार्यक्रम के संयोजक संत पृथु दास और विभु केशव दास (अध्यक्ष) इस्कॉन छिपिवाड़ा ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्य को सम्पन्न कराने का दायित्व वक्रेश जैन अध्यक्ष, प्राचीन श्री अग्रवाल दिगम्बर जैन पंचायत, चांदनी चौक, दिल्ली और दिगबर जैन मंदिर, चांदनी चौक के प्रबंधक पुनीत जैन ने भूमिका का निर्वाह किया।
कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रमुखों में मुफ़्ती मुकर्रम अहमद, शाही इमाम, फतेहपुरी मस्जिद, ताशी खेतुप, हेड, वर्ल्ड बुद्धिस्ट सेंटर, ईस्ट ऑफ कैलाश, संजय पेनजोर माला थांगपा, फादर एंथनी, सेंट मैरीज़ कैथोलिक चर्च, फादर जोसेफ नॉरबर्ट, सेंट मैरीज़ कैथोलिक चर्च, फादर नॉरबर्ट रिचर्ड डे (पास्टर), सेंट्रल बैपटिस्ट चर्च चांदनी चौक, करमेल एम. त्रिपाठी, हेड, लोटस टेम्पल, ईस्ट ऑफ कैलाश, फादर रिचर्ड, सेंट स्टीफेंस चर्च, कबीरपंथ के प्रमुख नंदलाल जी, ब्रह्माकुमारी की प्रमुख सिस्टर कविता, ग्रंथी अंग्रेज सिंह जैसे धर्म प्रमुखों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम में सभी धर्म प्रमुखों द्वारा शान्ति संदेश, मौन धारण, सफेद कबूतर को उड़ाया गया। साथ ही सभी धर्म प्रमुखो का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक संत पृथु दास ने कहा कि पृथ्वी पर सभी जीवों को जीने का समान अधिकार है।
मनुष्य को प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए “जियो और जीने दो” के सिद्धांत पर चलना चाहिए।
हालांकि, आज के समय में कुछ लोग प्राकृतिक एवं मानवीय व्यवस्था को नष्ट करने में लगे हुए हैं, जिससे असंतुलन और अशांति का वातावरण बन रहा है।
संत वक्रेश जैन ने दैवी स्वभाव के लोगों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे लोग सदैव विकास, सृजन, प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं, जबकि नकारात्मक प्रवृत्ति के लोग विनाश का कारण बनते हैं। इसलिए समाज को शांति, सह-अस्तित्व और सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने इष्टों से विश्व शांति के लिए प्रार्थना की और राजनीतिक नेतृत्व एवं समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व को एकजुट होकर अशांति, हिंसा और पर्यावरणीय संकटों से बचाने की आवश्यकता है।
मानव जीवन के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर, आपसी सहयोग और प्रेम के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। “अहिंसा परमो धर्म” के सिद्धांत को अपनाते हुए हर प्रकार की हिंसा को समाप्त कर शांति और सद्भाव का वातावरण स्थापित करना समय की मांग है।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि जिस प्रकार एक परिवार में विभिन्न स्वभाव के लोग मिलकर रहते हैं, उसी प्रकार पूरी मानवता को एक परिवार मानते हुए आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना से जीवन जीना चाहिए। विविधता में एकता ही विश्व शांति का आधार है।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में विश्व शांति, अहिंसा और प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।
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