बच्चों ने सीखी आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की पाठशाला
युवा तुर्क, चकिया (चंदौली)
पढ़ाई के साथ जीवन जीने की कला सिखाने का सशक्त माध्यम बन रहा सिल्वर बेल्स स्कूल का स्काउट्स एवं गाइड शिविर अब बच्चों के लिए ‘लाइफ स्किल्स लैब’ साबित हो रहा है। पांच दिवसीय शिविर के चौथे दिन विद्यार्थियों ने न केवल अनुशासन और सेवा भाव को आत्मसात किया, बल्कि नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाए।

शिविर के दौरान बच्चों ने किताबों से इतर व्यवहारिक जीवन के जरूरी कौशल सीखे। प्रातःकालीन सत्र में विद्यार्थियों ने तंबू लगाना, रस्सियों के विभिन्न प्रकार के गाँठ बनाना और सीमित संसाधनों में जीवन को व्यवस्थित ढंग से जीने का अभ्यास किया। समूह में कार्य करते हुए बच्चों ने टीमवर्क, जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कौशल के साथ संस्कार पर जोर:
शिविर में विद्यार्थियों को स्काउट्स एवं गाइड के मूल सिद्धांत—सेवा, अनुशासन और आत्मनिर्भरता—से जोड़ा गया। दीक्षा संस्कार के महत्व को समझाते हुए बच्चों में कर्तव्यबोध और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित की गई।
प्राथमिक उपचार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर दी गई व्यवहारिक जानकारी ने बच्चों को दैनिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का काम किया।
खेल-खेल में बढ़ा आत्मविश्वास
दोपहर के सत्र में आयोजित बाधा दौड़, समूह खेल और नेतृत्व विकास गतिविधियों ने बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने का अवसर दिया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना और मजबूत हुई।
प्रबंधन ने दिया प्रेरणा संदेश
विद्यालय की निदेशक सुषमा जायसवाल ने कहा,
“ऐसे शिविर बच्चों को सिर्फ गतिविधियां नहीं सिखाते, बल्कि जीवन के मूल्यों और चरित्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करते हैं।”
वहीं, सहायक प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ जायसवाल ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा,
“आज के दौर में किताबों के साथ जीवन कौशल का ज्ञान बेहद जरूरी है, और स्काउट्स-गाइड शिविर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”
अनुभव साझा कर सीखी अभिव्यक्ति
दिन के अंत में विद्यार्थियों ने समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और सीखने की उत्सुकता साफ नजर आई।
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