किसानों में आक्रोश, भाकियू अरा. पदाधिकारियों ने किया क्षेत्र का दौरा
युवा तुर्क, जालौन
बुंदेलखंड के जनपद जालौन में हाल ही में हुई भीषण ओलावृष्टि एवं विपरीत मौसम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हरनाम सिंह वर्मा ने जिला अध्यक्ष जालौन जयसारी के साथ प्रभावित गांवों का दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। दौरे के दौरान उन्होंने किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
निरीक्षण में सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लेखपाल द्वारा किए गए सर्वे में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। कई खेतों में जहां गेहूं की फसल खड़ी है, वहां खसरा में अन्य फसलों का उल्लेख किया गया है, जिससे किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर सीधा असर पड़ सकता है। इस गड़बड़ी को लेकर किसानों में गहरा रोष व्याप्त है।
इसके अतिरिक्त, फार्मर रजिस्ट्री को लेकर भी बड़ी लापरवाही सामने आई है। अनेक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री सही तरीके से नहीं बनाई गई है, जबकि सरकार की स्पष्ट व्यवस्था है कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को किसी भी प्रकार का सरकारी लाभ या मुआवजा नहीं मिलेगा। इससे बड़ी संख्या में किसान राहत से वंचित होने की आशंका में हैं।
प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हरनाम सिंह वर्मा ने कहा,
“पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में ओलावृष्टि से व्यापक नुकसान हुआ है और संगठन लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सर्वे में गड़बड़ियों को शीघ्र दुरुस्त नहीं किया गया और किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला, तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तत्काल निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, खसरा की त्रुटियों को सुधारा जाए और प्रत्येक प्रभावित किसान को शीघ्र राहत प्रदान की जाए। इस दौरान जिलाध्यक्ष दिनेश जैसारी, विजय कुमार शास्त्री, आयुष सिंह राजाबात जिलाध्यक्ष कानपुर देहात, अबधपाल, पुरुषोत्तम सक्सेना, अनुज, बृज बिहारी राजपूत, कमल खान जिला महासचिव, कमलेश सिंह नेता जी, राजेश पाल इत्यादि उपस्थित थे।
पढ़ते रहिए युवा तुर्क: दलित चिंतक एचएल दुसाध को कांग्रेस ने दी प्रमुख जिम्मेदारी
पढ़ते रहिए युवा तुर्क: एसआईआर- यूपी में घट गए 2.04 करोड़ मतदाता, भाजपा के प्रभाव वाले इलाकों में ज्यादा कटे

